झारखण्ड पेटरवार बोकारो

ज्यादा समय तक आदिवासी ही मुख्यमंत्री और विरोधी दल के नेता रहे हैं, फिर भी संताली भाषा को झारखंड में प्रथम राजभाषा का दर्जा नही दिया : देवनारायण मुर्मू

रिपोर्ट : पंकज सिन्हा

पेटरवार (ख़बर आजतक) : पेटरवार आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से आज दिन रविवार को 169 वां सिदो-कान्हू हूल दिवस बालिका मध्य विद्यालय पेटरवार के प्रांगण में मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता पेटरवार विजय कुमार मरांडी तथा संचालन बिरेंद्र हेम्ब्रम ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए आदिवासी सेंगेल अभियान के झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू ने कहा कि इसी दिन 30जून 1855 को महान वीर शहीद सिदो मुर्मू के नेतृत्व में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ साहेबगंज जिले के भोगनाडीह से संताल हूल का बिगुल फूंका गया था। जिसमे हजारों आदिवासी शहीद् हुए तथा अंग्रेजी फौजों की भी मौतें हुई।जिसे ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिल गई थी।

परिणाम स्वरूप अंग्रेजों ने संताल परगना दिशोम की स्थापना की तथा आदिवासियों के जल जंगल जमीन को सुरक्षित करने के लिए संताल परगना कास्तकरी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) बनाया।महान इतिहासकार कार्ल मार्क्स ने इसे दुनिया के इतिहास में प्रथम स्वतंत्र संग्राम कहा था।वीर शहीद सिदो मुर्मू और बिरसा मुंडा का ही सपना था “आबुआ दिशुम रे आबुआ राज” लेकिन आज यह सपना चकनाचूर हो चुका है।आज आदिवासी समाज मर रहा है।किसी भी नेता और पार्टियों ने आदिवासी समाज को बचाने का काम नही किया।आज़ झारखंड अलग हुए 23 वर्ष हो चुके हैं, आदिवासी रिजर्व सीट के कारण अनेकों आदिवासी नेता विधायक, सांसद, और पंचायत प्रतिनिधि बनें हैं लेकिन किसी भी नेता में आदिवासी आवाज नहीं है।

वे पार्टियों और सरकार की गुलामी करते हैं। झारखण्ड में ज्यादा समय तक आदिवासी ही मुख्यमंत्री और विरोधी दल के नेता रहे हैं। एक समय तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विरोधी दल नेता बाबूलाल मरांडी और महामहिम राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू तीनों संताल आदिवासी नेता ही थे, फिर भी एक मात्र राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संताली भाषा को झारखंड में प्रथम राजभाषा का दर्जा नही दिया, आदिवासियों की धार्मिक पहचान के लिए सरना धर्म कोड का बात नहीं किया। सीएनटी एसपीटी कानून को सख्ती से लागू नही किया। नौकरी के लिए कोई नीति नहीं बनाई।जिस कारण आज आदिवासी समाज मर रहा है।आज विभिन्न आदिवासी समाजिक संगठन भी सिदो -कान्हु हूल दिवस मना रहे हैं, लेकिन उनके पास भी आदिवासियों को बचाने का कोई एजेंडा नहीं है, सिर्फ़ नाचना गाना,खाना पीना और चेहरा चमकाने के लिए कुछ झूठा भाषण देने तक ही सीमित है।आज आदिवासी समाज को बचाने के लिए सिर्फ एक ही नेता और एक ही संगठन है आदिवासी सेंगेल अभियान और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू,जिन्होंने सिदो मुर्मू और बिरसा मुंडा के सपनों को जिंवित रखा है। उन्होंने 6 अप्रैल 2002 में सिदो मुर्मू कान्हु मुर्मू डाक टिकट जारी किया,2010 और 2016 में सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट के ग़लत संशोधन के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में मुकदमा दर्ज किया लंबा आंदोलन किया और बचाया।अभी भी इन्हीं के नेतृत्व में आदिवासियों के धार्मिक पहचान के लिए सरना धर्म कोड, झारखण्ड में संताली प्रथम राजभाषा, कुर्मियों सहित अन्य को आदिवासी बनने से रोकना, मरांग बुरू को जैनों से मुक्त करने, लुगुबुरु को हिन्दू करन से बचाने, पुरुलिया जिले के अयोध्या बुरु आदि को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए बृहद् आदिवासी एकता की जरूरत है और बृहद् आदिवासी एकता के लिए आदिवासी समाज में सुधार जरूरी है। जिसमें आदिवासी समाज से नशापान अंधविश्वास डायन डंडोम हिसका सुईया आदि को खत्म कर आदिवासी समाज में परंपरा से चल रहे वंशवादी स्वशासन व्यवस्था में सुधार कर जनतंत्रीकरण ज़रुरी है। इसके लिए आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से मांझी बदलो गांव बचाओ अभियान चल रहा है।आज आदिवासी समाज अपने ही स्वशासन व्यवस्था का गुलाम बने हुए हैं। इसको पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के नेतृत्व में सेंगेल टीम और सेंगेल कप्तान आजादी दिला कर आदिवासी एकता स्थापित करेगा। और आदिवासियों के हासा भाषा जाति धर्म और नौकरी बचाने का काम करेगा।इसे पूर्व कार्यकर्ताओं ने वीर शहीद सिदो मुर्मू कान्हु मुर्मू के चित्र पर माल्यार्पण किया तथा पेटरवार तेनूचौक से न्यू बस स्टैंड पेटरवार तक जूलूस निकाला।जूलूस में सिदो मुर्मू अमर रहे कान्हु मुर्मू अमर रहे फूलो-झानों अमर रहे सालखन मुर्मू जिन्दाबाद!आदि नारे लगा रहे थे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सेंगेल मांझी परगना मांडवा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष चंद्रमोहन मार्डी सेंगेल सरना धर्म मांडवा प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार मुर्मू हजारीबाग जोनल हेड विजय टुडू रामगढ़ जिला अध्यक्ष भुनेश्वर हेम्ब्रम बोकारो जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष ललिता सोरेन पेटरवार प्रखंड युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय प्रखंड संयोजक हरिश्चंद्र मुर्मू टुडू कसमार प्रखंड युवा मोर्चा अध्यक्ष रामप्रसाद सोरेन मंगल मुर्मू गंगाधर बेदिया रामसुंदर बेसरा गोविंद मुर्मू बाहामुनी मुर्मू गणेश मुर्मू दिलीप किस्कू सीता मुर्मू चांदमुनी सोरेन सहित सैकड़ों आदिवासी महिला, पुरुष उपस्थित थे।

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