झारखण्ड बोकारो

बोकारो में पहली बार सजी बच्चों की वैश्विक संसद, डीपीएस बोकारो में दो-दिवसीय मॉडल यूनाइटेड नेशन्स कॉन्फ्रेंस ‘अग्रणी’ शुरू

बोकारो (ख़बर आजतक) : विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उनके वैश्विक ज्ञान और कूटनीतिक कौशल को निखारने के उद्देश्य से डीपीएस बोकारो की मेजबानी में शनिवार को बोकारो जिले में पहली बार दो-दिवसीय मॉडल यूनाइटेड नेशन्स (एमयूएन) कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ हुआ। ‘अग्रणी – आरंभ से अनंत तक’ नामक डीपीएस बोकारो के इस प्रथम एमयूएन संस्करण में बच्चों की अनूठी वैश्विक संसद सजी है, जिसमें स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए 100 से अधिक प्रतिनिधि (डेलिगेट्स) शामिल हुए हैं। बोकारो में अपनी तरह का यह पहला मौका है जब झारखंड के विभिन्न जिलों – बोकारो, रांची, पाकुड़ आदि के अलावा निकटवर्ती पश्चिम बंगाल से भी विभिन्न विद्यालयों के 100 से अधिक प्रतिनिधि (डेलिगेट्स) कूटनीतिक मामलों पर विचार-मंथन को एकत्रित हुए हैं। अलग-अलग पोर्टफोलियो में बच्चे भारत, यूएसए, ईरान, जर्मनी, रूस, यूक्रेन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, लेबनान, आस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया, फिलिस्तीन, यूएई, दक्षिण अफ्रीका सरीखे देशों के प्रतिनिधि के रूप में अपना पक्ष रखने को जुटे हैं।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मेजबान डीपीएस बोकारो के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार, वरीय उप प्राचार्य अंजनी भूषण एवं उपप्राचार्या शालिनी शर्मा ने एमयूएन कार्यकारिणी परिषद के वरिष्ठ सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना – मां शारदे तू ज्ञान दे, वरदान दे… एवं विद्यालय गीत – आया है नया सवेरा… की सुरीली प्रस्तुति दी। अगली कड़ी में शोध एवं विश्लेषण प्रभारी मीनाक्षी तनु तथा विद्यार्थी समन्वयक ध्रुव लोधा ने सम्मेलन की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। तदुपरांत छात्राओं ने गणेश वंदना पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति से सबकी भरपूर तालियां बटोरीं।

दुनिया में सकारात्मक बदलाव के लिए युवाओं की वैश्विक जागरुकता जरूरी : प्राचार्य डॉ. गंगवार
प्राचार्य डॉ. गंगवार ने सभी प्रतिनिधियों
का स्वागत करते हुए डीपीएस बोकारो की मेजबानी में अपने स्वयं के मॉडल यूनाइटेड नेशंस के इस वृहत आयोजन को गौरवपूर्ण बताया। कहा कि यह मंच युवा मस्तिष्कों को विचारशील, जिम्मेदार और वैश्विक स्तर पर जागरूक नागरिक बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह एक आयोजन मात्र नहीं है; यह विद्यार्थियों में कूटनीति, तार्किक सोच, सहयोग और सहानुभूति के मूल्यों का परिचायक है। विद्यालय का सक्रिय एमयूएन क्लब विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से ऊपर उठाकर वैश्विक पटल की चुनौतियों से रूबरू करा रहा है। उन्होंने कहा कि डीपीएस बोकारो का लक्ष्य शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ ऐसे सशक्त जिम्मेदार वैश्विक नागरिक तैयार करना है, जो अपनी आवाज और कूटनीति से दुनिया में सकारात्मक बदलाव ला सकें। इसके बाद प्रतिनिधि मामलों की प्रमुख अदित्रि प्रिया ने एमयूएन में सहभागी सभी समितियों, उनके एजेंडों तथा कार्यकारिणी परिषद के सदस्यों से परिचित कराया। कार्यकारिणी परिषद के मुख्य सलाहकार आर्यन राज ने एमयूएन की स्थापना की पृष्ठभूमि रेखांकित की। धन्यवाद ज्ञापन आयोजन समिति की प्रतिनिधि वर्तिका दुबे ने किया।

अलग-अलग समितियों के अपने-अपने एजेंडे
कार्यक्रम में अलग-अलग कमेटियों के अपने-अपने खास एजेंडे तय किए गए हैं, जिन पर वे अलग-अलग सत्रों में चर्चा करेंगे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) का एजेंडा ‘सीमा पार संकट के संदर्भ में प्रवासियों, शरणार्थियों और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों के अधिकार’ रखा गया है। वहीं, ऑल इंडिया पॉलिटिकल पार्टीज मीट (एआईपीपीएम) का एजेंडा ‘बिहार में चुनावी अभियानों और मतदाता जनादेश द्वारा लोकतांत्रिक स्थिरता को प्रभावित करने के तरीकों का आकलन करना तथा आगामी बंगाल चुनावों में उभरते सामाजिक-राजनीतिक रुझानों को आकार देना’ है। जबकि, झारखंड विधानसभा के मॉडल में जनजातीय गौरव दिवस के लक्ष्यों का सम्मान करते हुए जनजातीय समुदायों के लिए भूमि और सामुदायिक अधिकार सुरक्षित करने हेतु झारखंड के वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की समीक्षा की जाएगी। इसमें किसी भी मॉडल यूनाइटेड नेशंस सम्मेलन के पत्रकारिता-निकाय इंटरनेशनल प्रेस की भी सहभागिता है। दोनों दिन की प्रस्तुतियों में समग्र प्रदर्शन के आधार पर कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को उत्कृष्ट प्रतिनिधियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

विद्यार्थी-जीवन से ही कूटनीति का पाठ सिखाता है एमयूएन
विदित हो कि मॉडल यूनाइटेड नेशंस संयुक्त राष्ट्र की एक शैक्षिक सिम्युलेशन (नकल) है, जिसमें विद्यार्थी विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भूमिका निभाते हैं। वे संयुक्त राष्ट्र की तरह ही अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वाद-विवाद और चर्चा करते हैं, विभिन्न देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं और नीतियों का मसौदा तैयार करते हैं। विद्यार्थी जीवन में ही कूटनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनने से छात्रों को बहुआयामी लाभ प्राप्त होते हैं। इससे उनमें सार्वजनिक भाषण कला, तार्किक चिंतन, वैश्विक समझ, वार्ता कौशल आदि प्रतिभा का विकास होता है, जो उनके समग्र उत्थान में काफी सहायक है। यह अनुभव छात्र-छात्राओं को भविष्य के ऐसे जिम्मेदार नेता के रूप में तैयार करता है, जो संवेदनशील भी हैं और समस्या समाधान में सक्षम भी।

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