राँची(नितीश मिश्र): एसबीयू परिसर में आयोजित शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा इनोवेशन और उद्यमिता पर आयोजित एफडीपी में झारखण्ड के विभिन्न विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्यों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान डॉ. मुकेश बाबू गुप्ता ने “बुनियादी वित्तीय योजना और बजट की समझ: स्टार्टअप के लिए वित्त” पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने स्टार्टअप के विभिन्न चरणों के विषय में बोलते हुए वित्तीय नियोजन के महत्व पर जोर दिया। इक्विटी फाइनेंसिंग के बारे में भी उन्होंने जानकारी दी।
सत्र के दूसरे भाग का संचालन एमटीआई सेल के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. हरिहरन ने किया। उन्होंने दो अलग-अलग सत्रों में “अग्रणी नवाचार और उद्यमिता गतिविधियों और परिसर में प्री-इन्क्यूबेशन के क्षेत्र में छात्रों के लिए सुरक्षित स्थान बनाने” और “उद्यमी भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य और परिदृश्य के साथ परिसर में गतिविधियों के संरेखण” पर बात की। विभिन्न वीडियो और इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से रचनात्मक अथवा तार्किक होने की अवधारणा को स्पष्ट किया।भारत में स्टार्टअप की पात्रता और नेटवर्किंग के महत्व के बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा की।
एक्सआईएस, राँची के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. हरप्रीत सिंह द्वारा संचालित सत्र में “उद्यमी उपक्रमों के माध्यम से समाधान के लिए उपयुक्त समस्याओं की पहचान” विषय पर चर्चा हुई।उन्होंने अपने अनुभवों पर चर्चा करते हुए समस्या-समाधान के विषय में अपना ज्ञान साझा किया। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा समस्या समाधान पर बात करते हुए उन्होंने इसके माध्यम से छात्रों में उद्यमिता विकास पर बात की।
दूसरे सत्र में प्रशिक्षक असीम कृष्ण दास, ट्रस्टी, रिसर्च इनोवेशन, न्यूक्लियस राँची द्वारा “बाजार तक पहुँच को समझने हेतू मार्केटिंग रणनीति और सफल उत्पाद या सेवा लॉन्च के लिए रोडमैप” विषय पर बात की। उन्होंने एक उद्यमी के विनिर्माण, व्यवसाय और सेवा क्षेत्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े रहने पर उपस्थित श्रोताओं के समक्ष अपना विचार प्रस्तुत किया। एक सफल उद्यमी के लिए बाजार अनुसंधान और रोडमैप की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया।