झारखण्ड बोकारो शिक्षा

डीपीएस बोकारो में चार-दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘तरंग’ का सोल्लास शुभारंभ

बोकारो (खबर आजतक): विद्यार्थियों की कलात्मक एवं सांस्कृतिक प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से डीपीएस बोकारो में मंगलवार को सांस्कृतिक सप्ताह (कल्चरल वीक) तरंग का शुभारंभ हुआ। उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच सम्मानित अतिथि डीपीएस रांची के प्राचार्य डॉ. श्रीराम सिंह, डीपीएस धनबाद की प्राचार्या डॉ. सरिता सिन्हा तथा डीपीएस बोकारो के प्राचार्य डॉ. ए एस गंगवार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर इसका उद्घाटन किया। चार-दिवसीय इस अंतर सदन सांस्कृतिक प्रतियोगिता के पहले दिन विद्यार्थियों ने समूह तबला वादन एवं एकल गायन में अपनी प्रतिभा का कुशल प्रदर्शन किया। पहले समूह तबला-वादन हुआ। आकर्षक पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे बच्चों की तबले पर फिरकियों की तरह नाचती उंगलियां, उनकी थाप और लयकारी का आपसी सामंजस्य अपने-आप में अनूठा रहा। झपताल के विभिन्न प्रकारों को बच्चों ने आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। कायदा, टुकड़ा, परन आदि को उन्होंने बखूबी पेश किया। इस स्पर्धा में जमुना हाउस की टीम पहले स्थान पर रही। गंगा व सतलज ने संयुक्त रूप से दूसरा तथा झेलम हाउस ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

वहीं, गजल विषय-वस्तु पर आधारित एकल गायन की शुरुआत चेनाब सदन से आयुषी राज ने मिले हैं दोस्त दिल को दुखाने के लिए की सुमधुर प्रस्तुति से की। इसके बाद सतलज हाउस के फैजा रक्ष ने हमको किसके गम ने मारा, रावी हाउस से आर्यन सिंह ने आज जाने की ज़िद न करो…, झेलम सदन से नवस्मिता मोहंती ने सलोना सा सजन है…, जमुना हाउस की अंतरा पांडेय ने रफ्ता-रफ्ता वो मेरे हस्ती का सामां हो गए… और अंत में गंगा सदन की अक्षिता पाठक ने दयार-ए-दिल की रात में चराग सा जला गया… की सुरीली पेशकश की। उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों को उन्होंने अपनी मौसिकी के इस अंदाज से मोह लिया तथा सभी की भरपूर तालियां बटोरीं। एकल गायन में बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर गंगा सदन की अक्षिता पाठक को प्रथम स्थान मिला। जबकि, झेलम हाउस की नवस्मिता मोहंती और चेनाब सदन की आयुषी राज ने क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाए। इनके साथ तबले पर विद्यालय के संगीत शिक्षक भास्कर रंजन डे, हारमोनियम पर विक्की आनंद पाठक एवं गिटार पर मृत्युंजय भट्टाचार्य ने कुशल संगत की। प्राइमरी इकाई के संगीत शिक्षक निमेष राठौर, जय प्रकाश सिन्हा एवं स्वीटी अनिल कुमार ने निर्णायकों की भूमिका निभाई। इसके पूर्व, कार्यक्रम के प्रारंभ में बच्चों ने अतिथियों का स्वागत पौधा भेंटकर किया। प्राचार्य डॉ. गंगवार ने उन्हें स्मृति चिह्न व शॉल से अलंकृत किया। स्वागत संबोधन में प्राचार्य ने बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को उजागर करना सांस्कृतिक सप्ताह का उद्देश्य बताया। संगीत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में हार-जीत से अधिक इसमें प्रतिभागिता मायने रखती है। जीवन प्रतिस्पर्धाओं से भरा है और ऐसे आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व-विकास में सहायक हैं। अतिथियों ने भी प्रतिभागी बच्चों की प्रस्तुतियों को खूब सराहा। अंत में धन्यवाद ज्ञापन वाइस हेड गर्ल श्रुति सिंह ने किया। विद्यालय के अश्वघोष कला क्षेत्र में आयोजित कल्चरल वीक के दूसरे दिन समूह-गान, तीसरे दिन समूह-नृत्य और चौथे दिन आर्केस्ट्रा की अंतर सदन प्रतियोगिताएं होंगी।

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