मीर उबैद उल्लाह
लोहरदगा (ख़बर आजतक) : लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री सुखदेव भगत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ग्रामीणों के काम के अधिकार की रक्षा के लिए 5 जनवरी से मनरेगा बचाओ संग्राम का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा में जो बदलाव कर रही है, वह सुधार के लिए नहीं बल्कि ग्रामीण भारत से काम, सम्मान और पंचायतों के अधिकार छीनने की साजिश है।
सांसद ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया एक अधिकार-आधारित कानून है, जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार मांगने का वैधानिक अधिकार देता है। कानून के तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना होता है।
उन्होंने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन तक काम मांगने का अधिकार है, लेकिन अब नए प्रावधानों के तहत काम तभी मिलेगा जब केंद्र सरकार पंचायतों को अधिसूचित करेगी और बजट जारी करेगी। सांसद ने आरोप लगाया कि नए VB-GRAM-G कानून में मजदूरी का बोझ राज्यों पर डाला जा रहा है, जहां केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत मजदूरी देगी और 40 प्रतिशत राज्य सरकारों पर थोप दी गई है।
सुखदेव भगत ने कहा कि इस नए कानून से बेरोजगारी बढ़ेगी, न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान होगा, मजदूरों का पलायन बढ़ेगा और महिलाओं की भागीदारी में गिरावट आएगी। आदिवासी और दलित परिवार सबसे अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि गांवों में परिसंपत्तियां बनाने का अधिकार समाप्त हो जाएगा और पंचायतें केवल एक एजेंसी बनकर रह जाएंगी, जिनके पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा।
सांसद ने कहा कि 5 जनवरी से पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने VB-GRAM-G कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की हत्या गोडसे ने की थी और अब केंद्र सरकार उनके नाम और विचारों की हत्या कर रही है।
