गिरिडीह झारखण्ड

युवा नेतृत्व विकास से ही बाल विवाह की रोकथाम संभव

गिरिडीह (ख़बर आजतक) : गिरिडीह जिले के पीरटंड स्थित तिलिया बहियार में सहयोगिनी संस्था द्वारा यूनिसेफ और कम्युनिटनी द यूथ कलेक्टिव के युवा पीर लीडर द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह समाप्ति के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस संबंध में कार्यक्रम के समन्वयक कमलदेव रजक ने बताया कि विगत 8 माह से युवा पीएफ लीडर्स के माध्यम से बाल विवाह बोलियां हिंसा बाल तस्करी जैसे मामले पर नेतृत्व क्षमता का विकास कार्यक्रम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि लड़कियों का उम्र 18 वर्ष और लडको का उम्र 21 वर्ष से नीचे बाल विवाह कानूनन जुर्म है। बाल विवाह में शामिल सभी व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों सहित उनके परिवार और समुदाय पर भी पड़ता है । बाल विवाह के कारण लड़कियों का भविष्य अंधकार मैं हो जाता है उनके शिक्षा , स्वास्थ्य तथा मानसिक विकास पर बुरी तरह से असर पड़ता है। बाल विवाह करने से मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है और बहुत सारे बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है ।


इस दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बताया गया कि बाल विवाह करने से लड़कियों की सुरक्षा के अधिकारों पर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही घरेलू हिंसा, यौन हिंसा का शिकार होने का खतरा बढ़ता है। जच्चा- बच्चा का मृत्यु दर बढ़ जाता है। और बाल विवाह करने से लड़कियों को कम उम्र में विधवा होने का डर रहता है। कार्यक्रम के दौरान सहयोगिनी की बसंती कुमारी गीता कुमारी करण कुमार से सहयोग तथा समुदाय के किशोर किशोरी शामिल थे।

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