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सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में 5 साल की देरी पर झारखंडी सूचना अधिकार मंच का हेमंत सरकार पर हमला

राँची: झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने राज्य सरकार पर सूचना आयोग को पंगु बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट के बार-बार निर्देश के बावजूद पिछले पांच वर्षों से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं की गई है, जो यह दर्शाता है कि हेमंत सरकार सूचना अधिकार कानून (RTI) से डरती है।

नायक ने कहा कि झारखंड संभवतः देश का पहला राज्य है जहां 2020 से सूचना आयुक्तों के पद रिक्त हैं और 20 हजार से अधिक मामले आयोग में लंबित पड़े हैं। आयोग की निष्क्रियता के कारण 80% से अधिक RTI आवेदनों का समय पर निपटारा नहीं हो पाया है, जिससे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ है।

उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “कांग्रेस सिर्फ कानून बनाना जानती है, उसे लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। सत्ता में साझेदार होने के बावजूद कांग्रेस ने RTI को मजबूत करने के लिए कोई आवाज नहीं उठाई।”

नायक ने मांग की:

  1. तत्काल मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की जाए।
  2. लंबित RTI आवेदनों का निपटारा 90 दिनों में पूरा हो।
  3. आयोग को पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने कहा कि RTI लोकतंत्र का आधार है और नागरिकों को सरकार के कामकाज पर नजर रखने का अधिकार देता है। उन्होंने नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएं और पारदर्शिता को कमजोर करने की साजिश को बेनकाब करें।

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