माता सीता की विदाई के समय सभी श्रोताओं के आंखों में आंसू छलकने लगे
पंकज सिन्हा
पेटरवार (ख़बर आजतक) : पेटरवार पांच दिवसीय श्री श्री 108 श्री गणेश पूजनोत्सव के शुभ मंगल बेला के तृतीय दिवस पर श्री रामचरितमानस का मंगल पाठ का प्रवचन किया गया। प्रवचन में श्री राम एवं सीता का शुभ विवाह का झांकी प्रस्तुत किया गया । जो आकर्षण का केंद्र बना था।कथा के केंद्र में लोगों की भीड़ उमड पड़ी । आचार्य श्री ने बताया कि जब श्री राम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई तो धनुष दो खण्डों में विभाजित हो गया , तभी आकाश से पूष्प वर्षा के साथ-साथ जयकारों से राजा जनक का महल गूंज उठा । आचार्य प्रवर श्री महेंद्र शास्त्री जी महाराज ने कहा कि श्री राम ,भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न सभी ने अपने सभी कुटुम्ब और पूरे समाज के साथ जनकपुरी नगरी राजा जनक के महल में अपने पिता राजा दशरथ की उपस्थिति में विवाह किया । दृश्य ऐसा लग रहा था जैसे मानो स्वर्ग की सारी खुशियां इस धरती पर आ गई हो । स्वर्ग से मंगल गीत गाए जा रहे थे पूरी जनकपुर नगरी खुशियों से भर गई । साधु संतों का आशीर्वाद मिल रहा था जनकपुर नगरी में नर-नारी सभी आनंदित थे । विवाह के उपलक्ष में सभी श्रोता एवं बारातियों को लड्डू दिया जा रहा था। हलवा पुरी का भोग सभी बारातियों को खिलाया गया सभी तृप्त थे ।सबमें संतुष्टि थी । माता सुनैना और राजा जनक ने सबको बड़े प्यार से भोजन कराकर अपनी पुत्री सीता को श्री राम के साथ, भरत के साथ मांडवी ,लक्ष्मण के साथ उर्मिला एवं शत्रुघ्न के साथ सुकृति की विदाई की । विदाई के समय सभी श्रोताओं के आंखों में आंसू छलकने लगे । मंच का संचालन कर रहे सुरेश साव का श्री महेंद्र शास्त्री जी ने नाम लेते हुए कहा कि सचमुच मंच का संचालन बहुत सुंदर तरीके से इन्होंने की । यह लगातार तीन दिनों से हमारे कथा( प्रवचन) के बारे में बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रचार प्रसार करते हुए लोगों का आह्वान किया और ये अपनी समिति के अनुरूप सोचकर संबाद करतेेे हैं ।मैं इनका प्रशंसा करता हूं । भगवान इनको और अधिक ज्ञान और बुद्धि दें । भगवत भजन में अपना यह समय जरूर दे। शास्त्री जी ने इन्हें रामपट्टी पहनाकर सम्मान किया । चूँकि आज कथा का विश्राम दिवस भी था इसलिए सभी श्रोताओं ने दान आदि करके श्री महेंद्र शास्त्री जी महाराज की विदाई की । कथा के अंत में पूजा समिति के संरक्षक श्री परमेश्वर अग्रवाल ने सभी बारातियों को मिष्ठान भजन आदि खिलाकर विदा की ।