Uncategorized

कोल इंडिया के सीएसआर सहयोग से आईआईटी बॉम्बे की ‘जीवोदया’ परियोजना को रेशम उत्पादन में बड़ी सफलता


राँची : कोल इंडिया के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) सहयोग से संचालित आईआईटी बॉम्बे की पायलट परियोजना ‘जीवोदया’ ने नैतिक रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। तीन वर्षों के सतत अनुसंधान एवं विकास के बाद आईआईटी बॉम्बे के ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र ‘सी-तारा’ ने अहिंसक रेशम निर्माण की अभिनव तकनीक विकसित की है।


इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें रेशम के कीड़ों की हत्या किए बिना रेशम प्राप्त किया जाता है। पारंपरिक पद्धति के विपरीत, रेशम के कीड़े कोकून बनाए बिना समतल सतह पर रेशमी धागा बुनते हैं और बाद में पतंगे में परिवर्तित होकर अपना प्राकृतिक जीवन चक्र पूरा करते हैं। इसी मानवीय दृष्टिकोण के कारण इसे ‘जीवोदया सिल्क’ नाम दिया गया है।
यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रेशम उत्पादक किसानों के लिए आजीविका का नया, सतत और नैतिक स्रोत भी प्रदान किया.

Related posts

उज्ज्वल प्रकाश तिवारी ने निशक्कता आयुक्त को किया पत्राचार, कहा ‐ राज्य के सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दिव्यांग बच्चे- बच्चियों हेतू रेम्प की सुविधा उपलब्ध कराई जाए

admin

डीएवी बरियातू में स्वामी श्रद्धानंद बलिदान दिवस मनाया गया

admin

admin

Leave a Comment