रांची : पारस एचईसी हॉस्पिटल ने जटिल नवजात चिकित्सा में एक और मिसाल पेश करते हुए 21 दिन की नवजात बच्ची की जान बचाई। गंभीर अवस्था में भर्ती बच्ची को तेज पीलिया, सांस लेने में परेशानी और शॉक की स्थिति थी। प्रारंभिक तौर पर सेप्सिस या निमोनिया की आशंका जताई गई, लेकिन विस्तृत जांच में संक्रमण के कोई प्रमाण नहीं मिले।

पीडियाट्रिक्स विभाग के विशेषज्ञ डॉ. निशांत पाठक और उनकी टीम ने बच्ची को हाई फ्रीक्वेंसी ऑसिलेटरी वेंटिलेशन व इनोट्रोप सपोर्ट पर रखा। जांच में बच्ची में दुर्लभ जी6पीडी डेफिशिएंसी और लगभग 10 मिमी का एओर्टोपल्मोनरी विंडो नामक जन्मजात हृदय दोष पाया गया। समय पर सही उपचार से बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ और उसे आगे की हृदय सर्जरी के लिए रेफर किया गया।
हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि अत्याधुनिक नवजात आईसीयू और अनुभवी टीम के कारण ऐसे जटिल मामलों का सफल इलाज संभव हो पाता
