राँची : सरला बिरला विश्वविद्यालय में शुक्रवार से चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने ओंकार को एकाग्रता का मूल मंत्र बताते हुए मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर दिया।

कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने आंतरिक परिवर्तन को व्यक्तित्व विकास की कुंजी बताया, वहीं महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने आध्यात्मिकता को भौतिकवाद का संतुलन कहा। विभिन्न सत्रों में स्वास्थ्य, पंचकोश सिद्धांत और सकारात्मक जीवनशैली पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि चरित्र, स्वास्थ्य और समाज का गहरा संबंध है। कार्यशाला में शिक्षकों व छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही।
