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एक समय वरदान था स्वांग वाशरी अस्पताल, आज बदहाली का शिकार: न डॉक्टर, न दवा, न सुविधा

June 29, 2026 Khaberaajtak@gmail.com 2 min read

प्रशांत अम्बष्ठ

गोमिया (बोकारो) सीसीएल के कथारा क्षेत्र अंतर्गत स्वांग कोल वाशरी का अस्पताल 1985 में मजदूरों के लिए वरदान बनकर खुला था। तब वाशरी कर्मी बेहद खुश थे। लेकिन 41 साल बाद आज यह अस्पताल सिर्फ ढांचा बनकर रह गया है। डॉक्टरों की कमी और रखरखाव के अभाव में अस्पताल की हालत जर्जर हो चुकी है।

स्थानीय वाशरी कर्मियों ने बताया कि एक समय यह अस्पताल पूरे क्षेत्र के लिए वरदान था। आज सुरक्षा दीवार टूटी पड़ी है। कई बार शिकायत के बाद भी मरम्मत नहीं हुई। छत जर्जर है, ढलाई में दरारें आ गई हैं और छड़ निकल आए हैं। डॉक्टर का चैंबर बुरी तरह टूटा हुआ है। खिड़की-दरवाजे, फर्नीचर को दीमक चट कर चुके हैं।

पूरे अस्पताल में सिर्फ चार कुर्सी और दो टेबल बचे हैं। यहां न ड्रेसर है, न केमिस्ट, न कंपाउंडर, न नर्स और न ही एम्बुलेंस। दवाइयों का नामोनिशान तक नहीं है। इलाज के लिए मजदूरों को भटकना पड़ता है।

परियोजना पदाधिकारी बैकुंठ मोहन बाबू ने माना कि डॉक्टर की कमी बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा, “डॉक्टर के लिए लगातार प्रयासरत हूं। डॉक्टर आ जाने से समस्या खत्म हो जाएगी।”

अस्पताल कर्मी बलराम नायक ने बताया कि अस्पताल प्रतिदिन खुलता है। वर्तमान में कर्मी विमला देवी, प्रभावती देवी और अन्य अस्पताल कर्मी नियमित ड्यूटी पर रहते हैं।

वहीं स्वांग कोलियरी में पदस्थापित डॉक्टर अमर कुमार ने बताया कि उन्हें कथारा, गोविंदपुर और स्वांग कोलियरी का प्रभार दिया गया है। स्वांग वाशरी के मरीजों का इलाज भी उनके यहां हो जाता है। उन्होंने भी स्वीकारा कि पूरे कथारा एरिया में चिकित्सकों की भारी कमी है।

स्वांग वाशरी के सभी ट्रेड यूनियन नेताओं ने एक स्वर में अस्पताल को सुचारू रूप से चलाने और डॉक्टर की पदस्थापना की मांग की है। नेताओं का कहना है कि हजारों मजदूर-कर्मी और उनके परिजन इलाज के लिए परेशान हैं। प्रबंधन को जल्द डॉक्टर बहाल कर दवा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि अस्पताल फिर से मजदूरों के लिए वरदान बन सके।

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