
मांडर: छोटानागपुर का ऐतिहासिक दो दिवसीय मुड़मा जतरा बुधवार को 40 पड़हा के पाहनों द्वारा जतरा खूंटा की पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हो गया। जतरा में झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा नेपाल, ओडिशा, बंगाल सहित अन्य क्षेत्रों से सरना धर्मावलंबी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्य के अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि मुड़मा जतरा आदिवासी परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखने का सशक्त माध्यम है। करीब एक हजार वर्ष पुरानी इस परंपरा को पूर्वजों ने शुरू किया था। उन्होंने जतरा स्थल के विकास के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया।
विशिष्ट अतिथि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मुड़मा जतरा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। इस विरासत को संरक्षित रखना सभी का दायित्व है। सरकार जतरा स्थल के विकास के लिए प्रयास करेगी।
धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने जतरा के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। इस दौरान श्रद्धालु खोड़हा के साथ पारंपरिक नृत्य करते हुए पहुंचे। विभिन्न प्रतीक चिह्नों के साथ निकले जतरा समूहों ने आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। आयोजन में राजी पड़हा जतरा संचालन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



