Category : झारखण्ड

झारखण्ड राँची राजनीति

आईएचएम के प्राचार्य डॉ. भूपेश को “मडुआ मैन” स्टार ऑफ झारखंड अवार्ड से किया सम्मानित

admin
नितीश_मिश्र राँची(खबर_आजतक): पर्यटन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा संचालित एवं झारखंड राज्य का सुप्रसिद्ध तथा एक मात्र सरकारी होटल मैनेजमेंट संस्थान, इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट राँची...
झारखण्ड राँची राजनीति

आदिवासी हिन्दू हैं, उन्हें सरना कोड की आवश्यकता नहीं: फूलचंद तिर्की

admin
नितीश_मिश्र राँची(खबर_आजतक): केंद्रीय सरना समिति एवं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की बैठक मंगलवार को समिति के केंद्रीय कार्यालय 13 आर आई टी बिल्डिंग कचहरी...
कसमार झारखण्ड बोकारो

कसमार : मुरहुलसुदी में किसानों को दिया गया तरबूज़ लगाने का प्रशिक्षण

admin
रिपोर्ट : रंजन वर्मा कसमार (ख़बर आजतक): मंगलवार को कसमार प्रखंड के मुरहुलसुदी गांव मे सोलर, आम बागवानी, PG किसानों को प्रदान संस्था जैनमोड़ एवं...
झारखण्ड धनबाद

कायस्थ शिरोमणि सेवा ट्रस्ट के एक्सकुटिव कमिटी के द्वितीय सत्र की प्रथम बैठक संपन्न

admin
धनबाद (ख़बर आजतक) : कायस्थ शिरोमणि सेवा ट्रस्ट के एक्सकुटिव कमिटी के द्वितीय सत्र की प्रथम बैठक का आयोजन प्रोफेसर कालोनी, हीरापुर स्थित ट्रस्ट के...
झारखण्ड बोकारो

लायंस क्लब ऑफ बोकारो द्वारा वीर बाल दिवस मनाया गया..

admin
रिपोर्ट : नितेश वर्मा बोकारो (ख़बर आजतक): मंगलवार को लायंस क्लब ऑफ बोकारो स्टील सिटी द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर के प्रांगण में वीर बाल दिवस...
झारखण्ड बोकारो शिक्षा

छात्र शिक्षक का प्रतिबिंब होते हैं : स्वामी अव्ययानंद सरस्वती

admin
बोकारो (खबर आजतक): चिन्मय विद्यालय में आज परम पज्य स्वामी अव्ययानंद सरस्वती ने शिक्षकों को सम्बोधित किया उन्होने कहा कि भारत के उपनिषदों में , पुराणों में , सभी शास्त्रों में शिक्षण व्यवस्था की और शिक्षण कला का अपूर्व उदाहरण मिलता है उन्होंने कहा कि वैदिक परम्परानुसार गुरू और शिष्य एक-दूसरे के सामने उपस्थित होते है। और परस्पर संवाद स्थापित करते है तो विद्या संधि की उपस्थिति होनी है और मुख्य उद्ेश्य सत्य का उद्घाटन होता है जिससे दोनों गुरू और शिष्य का विकास होता है। छात्र शिक्षक का प्रतिविंब होते है – उन्हांेने कहा कि शिक्षक के व्यक्तित्व की झलक छात्रों में दिखती है क्योंकि शिक्षक ही छात्रों के व्यक्तित्व और भविष्य के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए अपने भूमिका एवं दायित्व को समक्षिये एवं पूर्ण रूपेण इस प्रोफेशन मे मग्न होकर पूरी तन्मयता से अपना अध्यापन कार्य करिये, इसमें चूक होने से ना केवल छात्र और शिक्षक की हानि होगी वरन पीढ़ियाॅ इसका फल भोगेंगी। स्वविकास की परिभाषा बदलिये – उन्होने आगे कहा कि इन दिनों शिक्षा सहित सभी व्यवसाय में पदोन्नति एवं वेतन दृष्टि ही विकास के रूप में समक्षा जाता है। इसके कोई बुराई नहीं है लेकिन क्या यही सर्वोच्य लक्ष्य होना चाहिए। आपका अपना आंतरिक , मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास कितना हुआ उस पर आपने कभी गौर किया। हमेशा अपनी भूमिका को नित्य प्रभावी बनाने के लिए अपने विषयों से सम्बंधित ज्ञान एवं प्रविधि को जानिये स्वयं स्वाध्याय एवं आत्मानुशासन पर ध्यान दीजिए। जैसा छात्र चाहते है वैसा स्वयं बनिए – उन्होने कहा कि शिक्षक – छात्रों के बीच की समस्या का कारण है कि शिक्षक छात्र से सभी प्रकार के उच्च मूल्यों के पालन करने की उम्मीद करता है लेकिन स्वयं नहीं। आप सभी शिक्षक स्वयं पहले सभी मुल्यों का पालन करंें तभी इसका प्रभाव छात्र पर पड़ता है। सूरज दूसरे को चमकाने के लिए नहीं चमकता वह स्वयं को चमकाता है। प्रकाशित रहता है और उसके तेज में सारा जगत प्रकाशित होता है । उन्होने कहा परम पूज्य गुरूदेव स्वामी चिन्मयानंद महाराज के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरूदेव के पास एक बच्चे माता पिता पहुचे और उनसे अपने बच्चे की कमी के वारे मंे बात की और कहा कि स्वामी जी मेरे बच्चे को आप सही मार्ग पर लावें गुरूदेव ने कहा कि पहले तुम दोनों उन मुल्यों को अपनाओं। जीवन में उतारो जो तुम अपने बच्चे से आशा करते हो । ठीक इसी तरह एक शिक्षक के रूप में आप उन सभी मुल्यों को अपनावें जो आप छात्रों से उम्मीद करते है। छात्र आपके प्रतिविम्ब होते है। आपकी भूमिका माता-पिता के बीच वाली भूमिका होनी चाहिए ना पिता की तरह कढोर और ना माता की तरह अत्यधिक उदार । उन्होनें स्वामी विवेकानंद के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि एक पशु की तरह जन्म लेता है जीवन जीता है और पशु की तरह ही देह त्याग करता है । लेकिन मनुष्य एक मनुष्य की तरह जन्म लेता है लेकिन उसमें इतनी क्षमता होती है कि अपने कर्म से अपने गुण जीवन के सर्वोच्च उद्ेश्य को प्राप्त करे अमरता को प्राप्त करे। मृत्यु के  बाद भी वह जीवित  रहे , दूसरों को मार्ग प्रसस्त करने के लिए । इसलिए इस जीवन में जो भूमिका मिली है जो दायित्व मिला है , उसे इतनी शिद्धत से निभाइयें कि आपका भी विकास हो और आपके कर्म से पीढ़ी दर पीढी भी विकसित होती रहे। इस शुभ अवसर पर परम पूज्य स्वामिनी संयुक्तानंद सरस्वती , विश्वरूप मुखोपाध्याय- अध्यक्ष, महेश त्रिपाठी – सचिव , ब्रह्मचारी अन्नया चैतन्या ,प्राचार्य सूरज शर्मा , उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार सहित विद्यालय के शिक्षक उपस्थित थे कार्यक्रम का संचालन सुप्रिया चैधरी ने किया।...
खेल झारखण्ड बोकारो

शतरंज प्रतियोगिता : विष्णु कुमार महतो विजेता, अमन व सर्वेश बने उपविजेता

admin
बोकारो (ख़बर आजतक): बोकारो जिला चेस एसोसिएशन व चित्रगुप्त महापरिवार बोकारो की ओर से सेक्टर 5 स्थित बोकारो क्लब के बैडमिंटन हॉल में दो दिवसीय...
झारखण्ड राँची

किशोर मंत्री के नेतृत्व में आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो से मिला प्रतिनिधिमंडल, दी क्रिसमस की बधाई

admin
नितीश_मिश्र राँची(खबर_आजतक): फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष किशोर मंत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो से मिलकर...
झारखण्ड बोकारो

रोटरी क्लब द्वारा निःशुल्क स्वास्थ जांच शिविर

admin
डिजिटल डेस्क बोकारो (ख़बर आजतक): रविवार को रोटरी क्लब ऑफ़ बोकारो स्टील सिटी द्वारा अमेरिका की ‘प्राण बजाना क्लिनिक’ एवं ‘आशा फाउंडेशन’ के सहयोग से...
झारखण्ड बोकारो शिक्षा

पूर्वी क्षेत्रीय चिन्मय युवा केंद्र का एस.एम.एस कैंप सफलतापूर्वक सम्पन

admin
पूरी भारतीयता लिए भारत के लिए उभरेंगे कई युवा लीडर मूल्य की कमी ही सभी समस्याओं की जड़ है–स्वामी अव्ययानंद सरस्वती बोकारो (ख़बर आजतक): चिन्मय विद्यालय बोकारो में चिन्मय मिशन बोकारो के तत्वावधान में चिन्मय युवाकेन्द्र द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सरल मंत्र सफलता के कैंप सर्वोच्च सफलता को समेटे हुए सोल्लास सम्पन हुआ सभी कैंप-प्रतिभागी अति संतुष्ट दिखे इस कैंप का उदेश्य ऐसे शक्ति संपन्न युवा नेतृत्व को विकसित करना या जो भारत एवं भरतीय संस्कृति के लिए युक्त हो । हमेशा देेश की सेवा के लिए तत्पर रहे जिसका व्यक्तित्व धर्ममय हो क्योंकि धर्म ही विजय दिलाता है अपने इस उद्धेश्य की प्राप्ति में यह कैंप काफी सफल रहा है इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि कैंप में भाग लेने वाले युवामन विभीषण गीता में निहीत गूढ़ तत्व पर तर्क पूर्ण वातें करते सुने जा रहे हैं। आज दिन का प्रथम प्रहर रहा विचार मंपन का दौड़ कैंप में आज प्रातः काल योग, ध्यान, प्राणायाम एवं प्रार्थना के वाद युवा मन को अपने सोच के प्रति, अपने प्रति, समाज के प्रति, वातावरण के प्रति संवेदनशील होने के लिए गाय,दीवाल,पेड़,पशु,पक्षी, दिव्यांग जन, स्वशरीर सहित दस विषय दिए गए थे। इन विंदुओं पर उन्होने अपनी दृष्टि से सोचा और अपने अनुभवो का साझा किया, इसके बाद परम पूज्य स्वामी राघवानंद सरस्वती का ज्ञान सत्र हुआ । परम पूज्य स्वामी राघवांनद ने संदेश दिया कि मस्त रहिये ,व्यस्त रहिये और स्वस्थ रहिए । जो जिसके पास रहता है वही समाज को देता है आप के पास मस्ती होगी प्रेम होगा तो समाज भी प्रेममय मस्ती भरा होगा। एक नेता में यही गुण होना चाहिए उन्होंने कहा  कि सभी व्यक्ति नेता है सभी अपने स्तरपर किसी ने किसी का नेतृत्व करते हैं , इसलिए आपका आचरण अनुकरणीय होना चाहिए आपकी सोच मौलिक हो व्यापक दृष्टि हो उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि अंधानुकरण मत करिये नही ंतो जीवन भेड़चाल जैसा हो जाएगा, हमेशा विवेक सम्मत अनुकरण करें। द्वितीय प्रहर मे हुआ समापन समारोह दूसरे प्रहर में समापन समारोह का आयोजन हुआ । इस अवसर पर अपने आशीर्वचन मे युवाओं को सम्बोधित करते हूए परम पूज्य स्वामी अव्ययानंद सरस्वती ने कहा कि भारत में या विश्व में जहाॅ कही भी जो भी समस्या है उसका एक मात्र कारण है मूल्यों की कमी मानवीय मूल्यों की कमी के कारण ना व्यापक सोच उत्पन्न होता है ना स्यापक समावेशी दृष्टि का निर्माण । आप केवल मैक्सिमम आउटपूट की बात करते है लेकिन क्या क्वालिटी इनपुट दे रहे है। आज के तेजश्वी ऊर्वर युवामन में इसी बात की कमी हैं। सामथ्र्य और तेज से परिपूर्ण होते हुए भी युवा दिशाहीन हो रहे है और सामान्य सी चुनौतियों का सामना नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए सरल मंत्र सफलता के इंपावरिंग युथ लीडर विथ इंडियन एसेन्स जैसे युवा कैंप की आवश्यकता है जो समाज के अनुरूप् भारत और भारतीयता के लिए तेजस्वी प्रज्ञावन नेता का निर्माण कर सकें। चिन्मय युवाकेन्द्र की स्थापना का उद्वेश्य भी यही था। सभी युवा प्रसन्न और उत्साहित दिख रहे थे कैंप में भाग लेने वाले सभी छात्र पूरी तरह संतुष्ट दिख रहे थे। उन्होने भोजन , व्यवस्था सफाई और सुरक्षा से लेकर सभी तरह के प्रबंध की प्रशंसा की उन्होने परम पूज्य स्वामी अव्ययानंद सरस्वती के प्रति अपना आदर समर्पित करते हुए कहा कि वास्तव मं स्वामीजी हम सब के अन्तर्चक्षु को खोल दिया है हम सभी ने सोचने का तरीका सीखा क्या सोंचे , कैसे सोंचे, धर्म क्या है विजयी कौन होता है हम कैसे विजयी होगे ये सारे गुड़ स्वामी जी से सीखा। इन्हे अपना कर हम अपने मन बुद्धि विवेक , शरीर को तो व्यवस्थित कर सकने में सक्षम हुए है और साथ ही समाज  में भी अपना संरचनात्मक योगदान दे सकते हैं। इसंेंस आॅफ रामायण निवंध प्रतियोगिता के पाॅच प्रतियोगी हुए पुरस्कृत कैप के दौरान रामायण में निहित मूल्य पर निवंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमें 225 बच्चों ने भाग लिया। इनमें पाॅच सबसे बेहतरीन निबंध को स्वामी राघवानंद सरस्वती ने सम्मानित किया इनके नाम इस प्रकार है – स्वाति श्रुति पांडा (चिन्मया विद्यालय राउरकेला), रमन भारद्वाज (विदया भारती चिन्मया जमशेदपूर) अनामिका राउत (डी0 पी0 एस बोकारो) शिखा सुमन (चिन्मया बोकारो) सत्यम कुमार (जि0 जि0 पी0 एस बोकारो ) कैंप सर्टिफिकेट का हुआ वितरण। कार्यक्रम के अंतिम  पड़ाव में स्वामी अव्ययानंद सरस्वती एवं स्वामीनी सयुक्तानंद सरस्वती ने अपने आशीर्वाद के साथ कैप में भाग लेने का सर्टिफिकेट प्रदान किया तथा अपनी शुभ कामनाएॅ भी दी । परम पूज्या स्वामिनी संयुक्तानंद सरस्वती, परम पूज्य स्वामी राघवानंद सरस्वती , ब्रह्मचारणी प्रतिभा चैतन्य, विश्वरूप मुखोपाध्याय- अध्यक्ष, महेश त्रिपाठी – सचिव , ब्रह्मचारणी अन्नया चैतन्या , ब्रह्मचारी दिवाकर चैतन्या , ब्रह्मचारी दीपक पांडे, ब्रह्मचारी गोपाल मिश्रा, हरिहर राउत (मिशन सचिव), आर एन मल्लिक एवं प्राचार्य सूरज शर्मा सहित विद्यालय के शिक्षक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संजिव कुमार मिश्रा एवं विकास परिधारिया ने किया । कैंप काॅर्डीनेटर अरूनेश मयंक ने धन्यवाद ज्ञापन किया । अन्य लोगों में राहुल रॉय मनोज कुमार गुप्ता , शुभेन्दु मिश्रा एवं मिशन के सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन वेदिक शांतिपाठ से हुआ।...