झारखण्ड बोकारो शिक्षा

NABET (नाबेट) से मान्यता प्राप्त करने वाला झारखंड का पहला एकमात्र विद्यालय बना चिन्मय विद्यालय बोकारो

नाबेट से एक्रीडिटेशन प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि चिन्मय विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में देश का एक अग्रणी संस्थान : विश्वरूप मुखोपाध्याय

बोकारो (ख़बर आजतक) : चिन्मय विद्यालय बोकारो में आज प्रातः कालीन विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन नवनिर्मित ऑडिटोरियम हॉल में किया गया। प्रार्थना सभा में विद्यालय समिति के अध्यक्ष सह चिन्मय एजुकेशन सेल के पूवर्वर्ती क्षेत्र के निदेशक विश्वरूप उपाध्याय ने हर्ष के साथ घोषणा करते हुए कहा कि चिन्मय विद्यालय बोकारो झारखंड -बिहार में नाबेट- (नेशनल एक्रीडिटेक्शन बोर्ड ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग ) द्वारा उसके सम्पूर्ण गुणवत्ता, पूर्ण शिक्षा प्रणाली के लिए एक्रीडिटेशन दिया गया है। इस बात को सुनते ही पूरे सभागार में तालियों की गरगरहाट से सारा वातावरण खुशमय हो गया ।शिक्षक कर्मचारी और छात्र खुशी से झूम उठे और एक दूसरे को बधाई देने लगे। श्री मुखोपाध्याय ने कहा कि नावेट-नेशनल एक्रीडिटेक्शन बोर्ड ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग भारत सरकार के क्वालिटी सर्किल ऑफ इंडिया का एक कांस्टीट्यूशनल बॉडी है। जो भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने एवं उसे विश्व स्तर स्तरीय बनाने के लिए कार्य करता है । प्रशिक्षण भी देता है। जो विद्यालय नावेट द्वारा निर्धारित मानदंड को प्राप्त करते हैं उन्हें एक्रीडिटेशन प्रदान करता है ।

विद्यालय के सचिव महेश त्रिपाठी ने इस शानदार उपलब्धि के लिए विश्वरूप उपाध्याय को बधाई देते हुए कहा कि यह संपूर्ण परियोजना संकल्प डिजाइन क्रियान्वयन से लेकर मूल्यांकन तक सभी कार्य श्री विश्वरूप मुखोपाध्याय की निर्देशन में हुआ है ।यह हमारे संपूर्ण चिन्मय परिवार के लिए आज बहुत ही गौरव की बात है । क्वालिटी सर्कल ऑफ इंडिया की संवैधानिक इकाई नावेट – (नेशनल एक्रीडिटेक्शन बोर्ड ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग) इस तथ्य को स्वीकार करही एक्रीडिटेशन प्रदान करती है । हमारा विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में ,छात्रों के समग्र विकास में लगातार कार्य कर रही है ।

विद्यालय के प्राचार्य श्री सूरज शर्मा ने कहा कि विद्यालय के लिए इस अविस्मरणीय उपलब्धि के लिए अध्यक्ष विश्वरूप मुखोपाध्याय, विद्यालय एचआरडी विभाग की प्रभारी सुप्रिया चैधरी एवं सभी शिक्षक -शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि हमें इस बात का गर्व है कि नावेट से एक्रीडिटेशन झारखंड का पहला एवं एकमात्र विद्यालय चिन्मय विद्यालय है । यह एक्रीडिटेशन देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों को प्राप्त हुआ है । यह बात की पुष्टि ब्रिटिश काउंसिल भी कर चुका है ।और सीबीएसई ने तो चिन्मय विद्यालय को न्यू जनरेशन ऑफ स्कूल भी घोषित किया है। सर्वोपरि नावेट द्वारा प्राप्त एक्रीडिटेशन सोने पर सुहागा का काम कर रहा है ।

उन्होंने कहा कि यह तो एक छलांग मात्र ही है आगे और भी विकास करना बाकी है । इसके लिए हम सभी को हर संभव प्रयास के लिए तैयार रहना है ।उन्होंने इस उपलब्धि को परम पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के श्री चरणों में समर्पित किया और कहा कि जब हम सभी परम पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद महाराज की 108 में जयंती मना रहे थे । वंचित वर्गों के बीच शहर में अन्न वितरण एवं श्रीमद्भागवत गीता के साथ पेयजल का वितरण कर रहे थे। तभी अपहराण संध्या 4:18 बजे पर नाबेट संस्था की ओर से बधाई के साथ एक्रीडिटेशन मिलने की सूचना प्राप्त हुई । परम पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती सहित सभी प्रमुख गुरुजनों के प्रति आभार प्रकट किया। वास्तव में यह उपलब्धि चिन्मय विद्यालय बोकारो झारखंड के ताज में जरा वह नायाब नगीना है जिसकी चमक भारत के कई राज्यों में फैल रही है । यही कारण है कि भारत के कई राज्यों से छात्र-छात्राएं चिन्मय विद्यालय बोकारो में अपने जीवन को सवारने के लिए शिक्षा प्राप्त करने पहुंचे हैं। नावेट से एक्रीडिटेशन प्राप्त कर चिन्मय विद्यालय बोकारो नगर ही नहीं संपूर्ण झारखंड का गौरव बन चुका है।

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