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डीपीएस बोकारो के नन्हे सुरसाधकों ने बहाई राष्ट्रप्रेम की अविरल सरिता

Khaberaajtak@gmail.com1 min read

‘धरोहर’ के दूसरे दिन गूंजे देशभक्ति के तराने, सतलज और जमुना सदन बने संयुक्त विजेता

बोकारो (ख़बर आजतक) : जब मासूम हाथों में तिरंगा लहराया और नन्हे कंठों से राष्ट्रप्रेम की सुमधुर स्वरलहरियां फूटीं, तो समूचा वातावरण देशभक्ति के अनूठे रस में सराबोर हो उठा। मौका था दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो की प्राइमरी इकाई के तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘धरोहर’ के दूसरे दिन का। बुधवार को आयोजित अंतर-सदन समूहगान प्रतियोगिता अपने-आप में अत्यंत खास, भव्य और अलौकिक बन पड़ी। राष्ट्रध्वज के तीन रंगों की छटा बिखेरते आकर्षक परिधानों में सजे-संवरे नन्हे सुरसाधकों ने अपनी रसमयी प्रस्तुतियों के जरिए मां भारती के प्रति असीम प्रेम और राष्ट्रभक्ति की ऐसी अविरल धारा प्रवाहित की कि उपस्थित हर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठा।

हाथों में लहराते राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बीच बच्चों ने राग-रागिनी की माला में पिरोए अपने गीतों के माध्यम से जहां एक ओर नए भारत की अदम्य शक्ति को दर्शाया, वहीं दूसरी ओर देश के अमर बलिदानियों को नमन करते हुए राष्ट्ररक्षा के संकल्प को दोहराया और आगे आने का आह्वान भी किया। राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत उनकी भावपूर्ण प्रस्तुतियों में जोश, ऊर्जा और उमंग का ऐसा अभूतपूर्व जज्बा देखने को मिला कि सुरों के साथ-साथ वतन की पावन मिट्टी की सोंधी महक चारों ओर बिखर गई। मन मोह लेने वाली भाव-भंगिमाओं और सुरों की मिठास ने हर सुनने वाले के रोंगटे खड़े कर दिए। संगीतमय यात्रा की शुरुआत करते हुए गंगा सदन के बच्चों ने ‘कदम-कदम बढ़ाए जा…’ से जोश का संचार किया। इसके बाद चेनाब सदन ने ‘…आगे बढ़ो विश्व में बजा दो डंका’, झेलम सदन ने ‘या रब रहे सलामत, भारत हमारा भारत…’, रावी सदन ने ‘हम सब भारतीय हैं…’, सतलज सदन ने ‘चलो जवानो बढ़ो जवानों मां ने हमें पुकारा है…’ तथा जमुना सदन के विद्यार्थियों ने ‘हिन्दुस्तां का परचम सदा लहराते रहेंगे हम…’ जैसे गीतों की जीवंत प्रस्तुतियां देकर हर दिल में देशभक्ति की अलख जगा दी। सुर, लय, आपसी समन्वयन, परिधान व अन्य मापदंडों के तहत बेहतर प्रदर्शन के आधार पर सतलज और जमुना सदन को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया। गंगा हाउस दूसरे, तो झेलम और रावी सदन संयुक्त रूप तीसरे स्थान पर रहे।

नन्हे गायकों के अदम्य आत्मविश्वास, प्रतिभा और भावुक कर देने वाली प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने सभी प्रतिभागियों को विजेता बताया। साथ ही, ऐसी रचनात्मक सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रतिभागिता को बेहद महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि संगीत आत्मा को अलौकिक शांति, तृप्ति और नया जीवन प्रदान करता है। सुरों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की अलख जगाने वाले इस सफल आयोजन के लिए उन्होंने नन्हे कलाकारों के साथ-साथ प्राइमरी विंग के सभी सहयोगी शिक्षकों को बधाई दी। उक्त प्रतियोगिता के निर्णायकों में सीनियर इकाई के वरिष्ठ संगीत शिक्षक मृत्युंजय भट्टाचार्य, विक्की आनंद पाठक एवं शुभोजीत मिश्रा शामिल रहे। प्रतियोगिता का संचालन छात्र चिरंजीत व अदिति ने किया।

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