प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे, लाखों गर्भवती महिलाओं को मिला लाभ

रांची/नई दिल्ली: गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान 8 जून को अपने 10 वर्ष पूरे कर रहा है। 9 जून 2016 को शुरू की गई यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच और परामर्श उपलब्ध कराना है।

अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष जांच शिविर लगाए जाते हैं। इस दौरान गर्भवती महिलाओं की मुफ्त स्वास्थ्य जांच, रक्त और मूत्र परीक्षण, अल्ट्रासाउंड, पोषण संबंधी परामर्श तथा आयरन और कैल्शियम की दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

योजना का विशेष फोकस ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं पर है, ताकि गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं की समय रहते पहचान की जा सके। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाले मामलों को चिन्हित कर उन्हें बेहतर उपचार के लिए रेफर किया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान के कारण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिली है। साथ ही गर्भवती महिलाओं में नियमित जांच के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। स्वास्थ्य कर्मी और आशा कार्यकर्ता प्रत्येक माह महिलाओं को 9 तारीख को जांच के लिए अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है, ताकि हर गर्भवती महिला समय पर जांच और उपचार का लाभ उठा सके।

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