
कल्चरल वीक ‘धरोहर’ में डीपीएस बोकारो के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा से किया मंत्रमुग्ध
बोकारो (ख़बर आजतक) : दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में चल रहे सांस्कृतिक सप्ताह – धरोहर के क्रम में गुरुवार को अंतर-सदन ऑर्केस्ट्रा प्रतियोगिता आयोजित की गई। समसामयिक बॉलीवुड संगीत पर आधारित इस कार्यक्रम में विद्यालय के सभी छह सदनों के प्रतिभागियों ने सदाबहार धुनों की ऐसी झड़ी लगाई कि पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। तबला, गिटार, क्लैप बॉक्स, की-बोर्ड, बांसुरी, ड्रम व कोंगो सहित भांति-भांति के वाद्ययंत्रों पर उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति उनकी कलात्मक प्रतिभा बिखेर रही थी। इनमें बेटियां भी किसी से कम नहीं रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत रावी हाउस की ऊर्जावान टीम ने आजा-आजा…, कोई मिल गया…, बचना ऐ हसीनों… की धुनों का सुंदर सम्मिश्रण प्रस्तुत किया। इसके पश्चात क्रमशः चेनाब सदन की टीम ने डॉन, वो लड़की… बदतमीज़ दिल, काली-काली आंखें…, सतलज के प्रतिभागियों ने चांद मेरा दिल, बिन तेरे सनम, वो मेरा खुदा, पठान, धूम, जमुना हाउस के दल ने जनम-जनम…, तुमको पाया…, मितवा…, ये रात में जो…, झेलम टीम ने अज़ीब दास्तां…, दम मारो दम…, जाने-जां…, एक हसीना थी… तथा अंत में गंगा सदन के बच्चों ने ये रातें ये मौसम…, सांसों की माला… दिलवर मेरे…, भीगी-भीगी… गीतों की धुनें बजाकर समां बांध दिया। इस प्रतियोगिता में बतौर निर्णायक अंजलि कुमारी, प्रणति दास एवं मयंक कुमार भक्ता मौजूद रहे।

इसके पूर्व, अंतर-सदन समूहगान प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक गीतों की सुरीली झड़ी लगाकर देश की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रदर्शन किया। चेनाब सदन के प्रतिभागियों ने राजस्थानी रुणिचे रा धणिया… से इस कड़ी की शुरुआत की। इसके बाद जमुना हाउस के विद्यार्थियों ने रंगबत्ती रे… गाकर ओडिशा की संस्कृति को दर्शाया, वहीं रावी हाउस के छात्र-छात्राओं ने झूला तो पड़ गए अमुआ की डाल पर… गाकर उत्तर प्रदेश की परंपरा के रंग बिखेरे। इसी प्रकार, सतलज सदन के दल ने तोमाय हृदय माझे राखिबो… की प्रस्तुति से पश्चिम बंगाल की परंपरा को प्रदर्शित किया, तो गंगा सदन की टीम ने में कत्तां प्रीतां नाल… गाकर पंजाबी कला-संस्कृति के उल्लास को प्रदर्शित किया। अंत में झेलम हाउस के विद्यार्थियों ने मोर छोटानागपुर… झारखंड प्रदेश की सांस्कृतिक संपन्नता को बखूबी प्रदर्शित किया। समूहगान प्रतियोगिता में प्राइमरी विंग के शिक्षक जय प्रकाश सिन्हा, प्रियंका एवं स्वीटी अनिल कुमार ने निर्णायकों की भूमिका निभाई। दोनों प्रतियोगिताओं के परिणामों की घोषणा बाद में की जाएगी।

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने विद्यार्थियों की इस कलात्मक प्रतिभा को सराहते हुए संगीत को आत्मिक और मानसिक शांति का सबसे सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां की संस्कृति यहां की धरोहर है, जिसे बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से न केवल प्रदर्शित किया, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का संदेश भी दिया। कार्यक्रम के दौरान मंच-सज्जा और रंग-बिरंगे परिधानों में आए प्रतिभागियों की रूप-सज्जा भी देखते ही बन रही थी। इस दौरान निर्णायकों ने भी अपने विचार रखे तथा विद्यालय के संगीत शिक्षकों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से खूब समां बांधा।
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