
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के आध्यात्मिक योगदान, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि अमर चेतना है, जो भारतीय ज्ञान, अध्यात्म और संस्कारों को जन-जन तक पहुंचा रही है। उन्होंने 1993 में वडोदरा में स्वामी चिन्मयानंद से हुई मुलाकात को याद करते हुए कहा कि गुरुदेव के साथ संवाद और आशीर्वाद उनके जीवन का भावनात्मक अनुभव रहा।

मोदी ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद युवा शक्ति के विकास और मजबूत भारत के निर्माण को लेकर विशेष रूप से चिंतित रहते थे। उन्होंने चिन्मय मिशन के युवा स्वयंसेवकों की सराहना की, जिन्होंने 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा कर एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, वेदांत और उपनिषद आज भी राष्ट्र को दिशा दे रहे हैं। स्वामी चिन्मयानंद ने गीता ज्ञान यज्ञ के माध्यम से भारतीय दर्शन को आम लोगों तक पहुंचाया और सांस्कृतिक जागरण को नई गति दी।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान, तकनीक, मातृभाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के राम मंदिर और केदारनाथ-बद्रीनाथ के पुनर्विकास को उन्होंने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एकजुट होने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि चिन्मय मिशन की आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्र निर्माण का संकल्प मिलकर भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।



