
रांची: झारखंड के आदर्श ग्राम आरा-केरम में शनिवार को ग्राम विकास के भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित पुस्तक ‘आरा-केरम व्याख्यान: ग्राम विकास के भारतीय दृष्टिकोण पर डॉ. शशांक कुलकर्णी का मूलभूत चिंतन’ का लोकार्पण किया गया। इसके साथ विचार संगोष्ठी भी आयोजित हुई। पुस्तक झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के प्राध्यापक डॉ. शशांक कुलकर्णी के व्याख्यान पर आधारित है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि यह पुस्तक युवाओं को ग्राम विकास की भारतीय अवधारणा समझने में मदद करेगी और इस दिशा में नया मानक स्थापित कर सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय ग्राम विकास टोली के सदस्य सिद्धिनाथ सिंह ने की। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास के बिना भारत की प्रगति अधूरी है। डॉ. कुलकर्णी का चिंतन समाज के लिए उपयोगी है।
पुस्तक में ग्राम विकास को केवल आधारभूत सुविधाओं तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी, स्थानीय क्षमताओं, भारतीय ज्ञान परंपरा और सामुदायिक चेतना से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
मौके पर संपादक मंडल के सदस्य डॉ. रत्नेश सिंह, युवा शोधकर्ता आदित्य, सीयूजे के परीक्षा नियंत्रक बीबी मिश्रा, प्राध्यापक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।



