
रांची: रांची विश्वविद्यालय में शुक्रवार को ‘डिजिटल युग में शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। आर्यभट्ट सभागार में हुए कार्यक्रम में 450 प्रशिक्षु शिक्षकों और 50 प्राध्यापकों ने भाग लिया।
कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कभी मनुष्य का स्थान नहीं ले सकता, क्योंकि शिक्षा का केंद्र मानवीय संवेदना है। तकनीक सीखने की प्रक्रिया आसान बनाती है, लेकिन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्य विकसित करने में शिक्षक की भूमिका अहम है।
विशेषज्ञ डॉ. पूजा ने भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सहानुभूति और आत्म-जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. नीतू शर्मा ने मोबाइल और लैपटॉप के अत्यधिक उपयोग के संभावित मानसिक दुष्प्रभावों तथा डिजिटल उपकरणों के संतुलित इस्तेमाल की जानकारी दी।
विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में तकनीक के साथ मानसिक स्वास्थ्य और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर जोर दिया गया।



