
तेनुघाट : तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम फहीम किरमानी की अदालत ने जानलेवा हमले के मामले में 12 अभियुक्तों को 7 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
सजा पाने वालों में कसमार थाना निवासी मोहम्मद शाहिद अंसारी, शेखावत उर्फ सहावत अली अंसारी, मोहम्मद रिजवान अंसारी, इस्माइल अंसारी, मोहम्मद शौकत अंसारी, नसीम उर्फ वसीम अंसारी, शेर मोहम्मद अंसारी, मो. फिरोज अंसारी, कौसर अली, तौकीर उर्फ तौकीर अंसारी, साहजन उर्फ सहजावन अंसारी और छोटे लाल अंसारी शामिल हैं।
बताते चलें कि कसमार थाना क्षेत्र के गर्री निवासी जुबेदा खातून ने कसमार थाना प्रभारी के समक्ष बयान दर्ज कराया था कि दिनांक 25.09.17 की रात्रि लगभग 11 बजे शाहिद अंसारी कुछ लोगों के साथ उनके घर आया और बोला कि कल तुम लोग गर्री का घर छोड़कर सभी परिवार भाग जाओ, वरना जान से मार देंगे और पूरे परिवार की संपत्ति लूट लेंगे।
पुनः दिनांक 26.09.17 को दिन के 11 बजे मेरे देवर कलीम अंसारी के घर पर जमीन की पंचायती करने के बहाने मेरे पति जैनुल आबेदीन को बुलाया गया। वहां पहुंचते ही शेखावत अंसारी, रिजवान अंसारी, इस्माइल अंसारी, वसीम अंसारी, तौकीद अंसारी, शेर मोहम्मद अंसारी, अजीमुद्दीन अंसारी, तस्लीम अंसारी, फिरोज अंसारी, कौशर अंसारी, समशूल अंसारी, तौकीर अंसारी, सहजन अंसारी, छोटेलाल अंसारी, जलील अंसारी सहित अन्य 10-15 लोग जो अपने साथ तलवार, टांगी, लोहे की रॉड, लाठी-डंडा बोलेरो गाड़ी में छुपा कर रखे थे, जान मारने की नीयत से हमला कर दिया।
आरोप है कि इस दौरान अभियुक्तों ने घर में घुसकर बदसलूकी करने का प्रयास किया। विरोध करने पर जैनुल आबेदीन, आलम अंसारी, हदीस अंसारी, कलाम अंसारी, हुसैन अंसारी, करीमुन निशा, मुख्तारुन निशा, शहजाद अंसारी सहित कई लोगों को मारकर जख्मी कर दिया। शेखावत अंसारी द्वारा घर में रखा बक्सा तोड़कर 50 हजार रुपये, मोबाइल एवं गले का सोने का चेन छीन लेने का भी आरोप है।
इस बयान के आधार पर कसमार थाने में मामला दर्ज किया गया था। आरोप पत्र समर्पित होने के बाद मामला स्थानांतरित होकर जिला जज प्रथम फहीम किरमानी के न्यायालय में आया। न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद अदालत ने सभी अभियुक्तों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सर्वेश आनंद सिंह ने बहस की।
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