
रांची: रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के अखड़ा में शनिवार को स्व. डॉ. करमा उरांव की 74वीं जयंती मनाई गई। समारोह में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को उनके विचारों और संघर्ष से प्रेरणा लेनी चाहिए।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि डॉ. करमा उरांव पारंपरिक आदिवासी सामाजिक व्यवस्था, पड़हा व्यवस्था, भाषा और संस्कृति के प्रबल समर्थक थे। उनका जीवन अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाने की सीख देता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और संवेदनशील बनाना भी है।
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने उनके संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों और रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए थे।
समारोह में कुलपति प्रो. सरोज शर्मा सहित कई शिक्षाविद् और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



