
‘अच्युतम केशवम’ की स्वर-लहरी और मनभावन झांकियों से भक्तिमय हुआ प्रांगण
बोकारो (ख़बर आजतक) : यशोदा के नटखट गोपाल, गोपियों के रास-बिहारी और संपूर्ण जगत के रक्षक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो का पूरा परिसर श्रद्धा, उल्लास और दिव्य भक्तिरस में डूब गया। गुरुवार को विद्यालय की प्राइमरी और सीनियर, दोनों ही इकाइयों में विशेष प्रार्थना सभाओं तथा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। नन्हे-मुन्ने बाल-गोपालों की मनमोहक प्रस्तुतियों, पारंपरिक वेशभूषा और सुरमयी भजनों ने सभी का मन मोह लिया। प्राइमरी विंग में आयोजित विशेष एसेंबली में नर्सरी, प्रेप और पहली कक्षा के बच्चों की रूप-सज्जा देखते ही बन रही थी। पीतांबर, माथे पर मोर-मुकुट, हाथों में बांसुरी और अधरों पर छलकती मासूम मुस्कान के साथ कान्हा और राधा रानी के रूप में सजे बच्चों ने पूरे माहौल को वृंदावन जैसा भक्तिमय बना दिया।

प्रेप के विद्यार्थियों ने राधा-कृष्णा फैशन शो में आत्मविश्वास के साथ रैंपवॉक कर सभी की भरपूर वाहवाही लूटी। इसी प्रकार, नर्सरी के नन्हे कलाकारों ने भक्तिगीत अच्युतम केशवम… की सुरीली प्रस्तुति से वातावरण में आध्यात्मिक मिठास घोली, तो वहीं कक्षा एक के विद्यार्थियों ने ऊर्जा और समर्पण से भरपूर कृष्ण नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कक्षा दूसरी से पांचवीं तक के विद्यार्थियों ने अपनी कक्षाओं में विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया। बच्चों ने अपने हाथों से रंग-बिरंगी माखन से भरीं मटकियां, कलात्मक बांसुरी और आकर्षक मोर-मुकुट बनाकर कान्हा की बाल-लीलाओं को नमन किया।
इधर, सीनियर विंग की छात्राओं ने मोहे लागी लगन मनमोहन से… भजन की सुरीली और भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया। इसी क्रम में छात्रा शांभवी झा ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा और उनके द्वारा दिए गए श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्मयोग के सिद्धांत पर एक विचारोत्तेजक और प्रभावी भाषण प्रस्तुत किया, जिसे सभी ने खूब सराहा।
अपनी समृद्ध संस्कृति से जुड़ाव जरूरी : प्राचार्य डॉ. गंगवार
विद्यार्थियों की इस अद्भुत प्रतिभा और भक्तिभाव की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने सभी को जन्माष्टमी की बधाई दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे पावन सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध भारतीय परंपराओं, नैतिक मूल्यों और महान सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मुस्कराते हुए अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने और कर्म को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सीख देता है। ऐसी गतिविधियों से बच्चों में न केवल छिपी प्रतिभा का निखार होता है, बल्कि उनमें आत्म-विश्वास और सामाजिक समरसता का भी विकास होता है।
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