
रांची: विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर होटल चाणक्या बीएनआर में आयोजित राज्यस्तरीय जागरूकता कार्यशाला में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने ब्लॉक स्तर तक जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और अर्ली डायग्नोसिस पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम में राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी लीवर सिरोसिस व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वायरल लोड जांच के लिए ट्रूनेट मशीनें राज्य के सभी पांच प्रमंडलों में उपलब्ध कराई जा रही हैं। रिम्स के प्रो. डॉ. अजित डुंगडुंग ने कहा कि हेपेटाइटिस-सी के लगभग 99 प्रतिशत मामलों का सफल इलाज संभव है, जबकि हेपेटाइटिस-बी को आधुनिक दवाओं से प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में हेपेटाइटिस से स्वस्थ हुए चार लोगों तथा इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया गया। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से जून 2026 तक 2.94 लाख से अधिक जांच की गईं। इस दौरान हेपेटाइटिस-बी की पॉजिटिविटी दर 3.36 प्रतिशत से घटकर 1.58 प्रतिशत हो गई, जबकि हेपेटाइटिस-सी की दर 0.14 प्रतिशत से बढ़कर 0.64 प्रतिशत दर्ज की गई। WHO के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 60 लाख लोग हेपेटाइटिस-सी से प्रभावित हैं।
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