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विकसित भारत और वाटर बजट को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ कार्यशाला

Khaberaajtak@gmail.com1 min read

बोकारो एक्शन प्लान के तहत चयनित पंचायतों को आदर्श पंचायत बनाने पर हुआ मंथन।

बोकारो : बोकारो जिले में ग्राम पंचायतों के समग्र, समावेशी एवं सतत विकास को गति देने के उद्देश्य से सोमवार को होटल स्वयंवर, जैनामोड़ में “बोकारो एक्शन प्लान” के अंतर्गत चयनित ग्राम पंचायतों के मुखियाओं एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन प्रदान एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से किया गया।

कार्यशाला में मुख्य रूप से VBG-RAM-G, VGPP (विकसित ग्राम पंचायत प्लान/विकसित ग्राम पंचायत विकास योजना) एवं वाटर बजट की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। पंचायतों को आदर्श एवं सतत विकास आधारित पंचायत के रूप में विकसित करने, स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास की प्राथमिकताएं तय करने, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा योजनाओं में ग्रामीण समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि पंचायतों को केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय विकास की महत्वपूर्ण संस्था के रूप में मजबूत करने की आवश्यकता है। पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ ग्रामीण समुदाय को भी योजना निर्माण और उसके क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदार बनाना जरूरी है।

कार्यशाला में प्रदान की पीयूषमई ने पंचायत विकास योजना को अधिक सहभागी, जन-केंद्रित और स्थानीय जरूरतों पर आधारित बनाने पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी पंचायत की विकास योजना तभी प्रभावी हो सकती है, जब उसमें गांव के लोगों की वास्तविक समस्याओं, आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को शामिल किया जाए।

सारथी नेटवर्क तथा पंचसूत्रा फाउंडेशन के गुलाब चंद्र ने कहा कि पंचायत के विकास की शुरुआत ग्राम स्तर की वास्तविक स्थिति और लोगों की जरूरतों को समझने से होनी चाहिए। गांव के लोगों को यह अवसर मिलना चाहिए कि वे स्वयं अपनी समस्याओं और प्राथमिकताओं को पंचायत के समक्ष रखें। पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका, सिंचाई, स्वच्छता और अन्य स्थानीय समस्याओं की पहचान समुदाय की सहभागिता से की जानी चाहिए।

सहयोगिनी तथा सारथी नेटवर्क के गौतम सागर ने कहा कि विकास की योजना “नीचे से ऊपर” की ओर तैयार होने पर उसकी उपयोगिता और प्रभाव दोनों बढ़ते हैं। ग्राम सभा और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से तैयार योजना स्थानीय वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करती है और उसके क्रियान्वयन में भी लोगों की जिम्मेदारी एवं स्वामित्व की भावना विकसित होती है।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि विकास योजनाओं को केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए। पंचायत में उपलब्ध संसाधनों, सरकारी योजनाओं और समुदाय की जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विकास की प्राथमिकताएं तय की जाएं। उन्होंने कहा कि पंचायत की योजना केवल कागज पर तैयार होने वाला दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में पंचायत के समग्र विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण रोडमैप होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि योजना तैयार करने के बाद उसके क्रियान्वयन, निगरानी और समीक्षा की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पंचायत प्रतिनिधियों को समुदाय के साथ नियमित संवाद करते हुए योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि जरूरत के अनुसार योजनाओं में सुधार किया जा सके और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

सूरज सेन ने VBG-RAM-G एवं पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पंचायत के समग्र विकास के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों, संसाधनों और जरूरतों की सही जानकारी होना आवश्यक है।

वेद प्रकाश ने VGPP पर चर्चा करते हुए कहा कि विकसित ग्राम पंचायत की अवधारणा केवल सड़क, भवन या अन्य आधारभूत संरचनाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। पंचायत का विकास तभी पूर्ण माना जाएगा, जब लोगों की जीवन गुणवत्ता, आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और पर्यावरण की स्थिति में भी सुधार हो। साथ ही वाटर बजट पर उन्होंने कहा कि पंचायत को अपने क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों और पानी की खपत की जानकारी होना जरूरी है। इससे जल संरक्षण की बेहतर योजना बनाई जा सकती है। उन्होंने तालाबों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, भूजल संरक्षण एवं पानी के विवेकपूर्ण उपयोग को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

कार्यशाला में उपस्थित पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को साझा किया। प्रतिनिधियों ने पेयजल, सिंचाई, सड़क, रोजगार, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

कार्यशाला के अंत में कहा गया कि “बोकारो एक्शन प्लान” पंचायतों को आदर्श, समावेशी एवं सतत विकास आधारित पंचायत के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि ग्राम पंचायत का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब योजना ग्राम की जरूरतों पर आधारित हो, समुदाय की भागीदारी से तैयार हो और योजनाओं के परिणाम जमीन पर दिखाई दें। कार्यक्रम में पंचायत जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों कल्याणी सागर, प्रकाश महतो, विजय कुमार जायसवाल, निहारिका सुकृति, सुमित्रा कुमारी, विनीता देवी, पुष्पा देवी, बबीता देवी, रेखा देवी, पंचानन महतो, सरिता देवी आदि उपस्थित थे।

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