
‘के-12’ शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव, कुशल नेतृत्व व अनुकरणीय योगदान के लिए हुए सम्मानित
बोकारो: शिक्षा जगत में अपने नवाचारों, अद्वितीय शैक्षणिक वातावरण और दूरगामी सोच के बूते दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो ने एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर अपनी सफलता का परचम लहराया है। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. अवनीन्द्र सिंह गंगवार को प्रतिष्ठित ‘एजुकेशन टुडे’ संस्था की ओर से आयोजित ‘नॉर्थ एजुकेटर्स समिट एंड नॉर्थ इंडिया स्कूल मेरिट अवॉर्ड्स 2026’ में ‘लीडर्स 2026’ के विशेष राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया। हरियाणा के गुरुग्राम स्थित द वेस्टिन में आयोजित भव्य और गरिमापूर्ण समारोह में देशभर से जुटे शीर्ष शिक्षाविदों, निदेशकों और नीति-निर्माताओं की उपस्थिति में उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान के-12 यानी बालवाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक की विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण नेतृत्व, अनुकरणीय योगदान, उद्देश्यपूर्ण नवाचार और भावी पीढ़ी को तराशने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रदान किया गया है।
एजुकेशन टुडे ने ‘लीडर्स 2026’ के तहत देशभर के गिने-चुने दूरदर्शी चेयरपर्सन्स, संस्थापकों और प्राचार्यों की सूची में डॉ. गंगवार को प्रमुखता से स्थान देते हुए यह माना कि उनके नेतृत्व और विजन ने न केवल उनके अपने संस्थान और विद्यार्थियों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में भी एक सकारात्मक और सार्थक बदलाव की बयार बहाई है। इसके लिए प्राचार्य को सम्मान के रूप में स्मृति-फलक और आकर्षक उपलब्धि प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। शनिवार को विद्यालय के वरीय उपप्राचार्य अंजनी भूषण तथा उपप्राचार्या शालिनी शर्मा ने प्राचार्य डॉ. गंगवार को उक्त राष्ट्रीय पुरस्कार सांकेतिक रूप से सुपुर्द करते हुए उन्हें पूरे विद्यालय परिवार की ओर से बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस उपलब्धि से पूरे डीपीएस बोकारो परिवार में हर्ष का वातावरण है।
अपने उद्गार में प्राचार्य डॉ. गंगवार ने इस राष्ट्रीय सम्मान का संपूर्ण श्रेय पूरे विद्यालय परिवार को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारे विद्यालय के प्रत्येक छात्र-छात्रा की अटूट लगन, समर्पित शिक्षकों के कड़े परिश्रम और प्रबंधन से लेकर अंतिम सदस्य तक के समेकित सहयोग का प्रत्यक्ष सुखद परिणाम है। जब पूरा परिवार एक सोच और एक दिशा में निष्ठापूर्वक प्रयास करता है, तो ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धियां स्वतः ही हासिल होती हैं। निश्चय ही यह सम्मान हमें शिक्षा के क्षेत्र में और भी नए मानदंड स्थापित करने की ऊर्जा देगा।
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