BREAKING NEWS
“मंत्री जी नहीं आएंगे तो अंतिम संस्कार नहीं करेंगे” — परिजनों की बात सुन भावुक हुए स्वास्थ्य मंत्रीजेएससीए की वार्षिक आमसभा में ऑडिटेड खाते मंजूर, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह लोकपाल नामितआदिवासी महाजुटान रैली को लेकर झारखंड में सियासी विवाद तेज, संगठनों ने जताई आपत्तिचैंबर चुनाव में मुकेश अग्रवाल की टीम ने बढ़ाई सक्रियता, व्यापारिक हितों पर हुई चर्चाश्रावणी मेला में उत्कृष्ट सेवा के लिए बोकारो के पुलिस निरीक्षक नवीन कुमार सिंह सम्मानितबोकारो रेलवे स्टेशन पर राज्यसभा सांसद खीरू महतो का जदयू कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत“मंत्री जी नहीं आएंगे तो अंतिम संस्कार नहीं करेंगे” — परिजनों की बात सुन भावुक हुए स्वास्थ्य मंत्रीजेएससीए की वार्षिक आमसभा में ऑडिटेड खाते मंजूर, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह लोकपाल नामितआदिवासी महाजुटान रैली को लेकर झारखंड में सियासी विवाद तेज, संगठनों ने जताई आपत्तिचैंबर चुनाव में मुकेश अग्रवाल की टीम ने बढ़ाई सक्रियता, व्यापारिक हितों पर हुई चर्चाश्रावणी मेला में उत्कृष्ट सेवा के लिए बोकारो के पुलिस निरीक्षक नवीन कुमार सिंह सम्मानितबोकारो रेलवे स्टेशन पर राज्यसभा सांसद खीरू महतो का जदयू कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत
Uncategorized

आदिवासी महाजुटान रैली को लेकर झारखंड में सियासी विवाद तेज, संगठनों ने जताई आपत्ति

August 30, 2026 Khaberaajtak@gmail.com 1 min read

रांची: प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर झारखंड में सियासी विवाद तेज हो गया है। विभिन्न आदिवासी संगठनों ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया कि रैली का स्वरूप बदलकर इसे कांग्रेस गठबंधन सरकार की राजनीतिक रैली में तब्दील कर दिया गया है।

केंद्रीय सरना समिति समेत संगठनों ने दावा किया कि शुरुआत में रैली को आदिवासी एकता महाजुटान के रूप में प्रचारित किया गया, लेकिन बाद में चर्च की कथित भागीदारी को लेकर विरोध के बीच इसका स्वरूप बदल गया। संगठनों ने पूर्व मंत्री बंधु तिर्की पर भी चर्च के प्रभाव में आदिवासी नेतृत्व को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईसाई या मसीही संगठनों को अपने नाम से आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन आदिवासियों के नाम पर किसी आंदोलन का नेतृत्व किए जाने का विरोध किया जाएगा। संगठनों ने आदिवासी समाज से ऐसे प्रयासों को लेकर सतर्क रहने की अपील की।

संयुक्त बयान में मुख्य पाहन जगलाल पाहन, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव, मेघा उरांव, सोमा उरांव और सन्नी टोप्पो शामिल रहे।

← चैंबर चुनाव में मुकेश अग्रवाल की टीम ने बढ़ाई सक्रियता, व्यापारिक हितों पर हुई चर्चा जेएससीए की वार्षिक आमसभा में ऑडिटेड खाते मंजूर, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह लोकपाल नामित →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News

Opinion

View All →
रम
रमेश शर्मा
वरिष्ठ संपादक

भारत की विदेश नीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है।

पव
पवन वर्मा
राजनीतिक विश्लेषक

लोकतंत्र की जड़ें मज़बूत करने के लिए शिक्षा में सुधार जरूरी है।

नप
नेहा पाटिल
आर्थिक विशेषज्ञ

बजट से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद थी, पर महंगाई चुनौती बनी है।

अक
अरुण कुमार
पूर्व IAS अधिकारी

सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल इंडिया की पहल कारगर है।