अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा सिंदरी जैसे शहर का एकमात्र श्मशान घाट

संवेदक धीमी रफ्तार एवं लापरवाही की वजह से श्मशान घाट अब तक है अधूरी

सिंदरी (घनबाद ): आधे दशक पूर्व सिंदरी में श्मशान घाट शुरू की गई, पर योजना के संवेदक की घीमी रफ्तार एवं लापरवाही की वजह से अब तक कार्य अधूरी है। राज्य में शहरों के विकास के लिए जिम्मेवार झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्कर डेवलपमेंट कंपनी (जुड़को) की योजनाओं की प्रगति काफी धीमी है। जुडको की छोटी बड़ी योजनाओं को मिलाकर विभिन्न शहरों में नागरिक सुविधाओं पर काम चल रहा है लेकिन आधे दशक पहले शुरू की गई है योजना धीमी रफ्तार की वजह से अब तक अधूरी है।

गुप्ता कंस्ट्रक्शन रांची के प्रोपराइटर दीपक गुप्ता से मोबाइल पर वार्ता करने के बाद बताया कि श्मशान घाट गैस पर आधारित है, मशीन आ गई है।

सिंदरी औद्योगिक नगर माना जाता है। यहां एसएससी सीमेंट, हर्ल, एफसीआई लिमिटेड एवं टासरा प्रोजेक्ट है। औद्योगिक नगर होने के बाद भी महाप्रबंधक की और से कोई भी व्यवस्था नहीं की गई थी। पूर्व में एचयूआरएल की और से शमशान घाट लाखों रुपए की लागत से बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन अधूरे कार्य में वापस हो गई।

औद्योगिक नगरी सिंदरी स्थित

श्मशान भूमि आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए हिन्दू पद्धति से अंतिम संस्कार का एकमात्र स्थान है। उचित देखभाल न होने के कारण यह बदहाल हो चुका है। उचित संसाधनों की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां दाह संस्कार के लिए आए लोगों को प्रक्रिया पूरा करने में परेशानी होती है। यहां बना कमरा और रोड की स्थिति भी जर्जर है। परिसर में कूड़ा जमा हुआ है. जिसकी सफाई करने वाला कोई नहीं है। इससे हमेशा बदबू आती रहती है। पूरे परिसर में कटीली झाड़ियां व जंगली घास उग आई है। यह सरकार की प्रक्रिया पूरी होने में 2 से 3 घंटे या इससे अधिक समय लग जाता है। इस दौरान अंतिम यात्रा में साथ आए लोगों को प्रक्रिया पूरी होने तक यहीं खड़े रहना पड़ता है, क्योंकि यहां बैठने के लिए कोई अन्य व्यवस्था नहीं है। गर्मी के मौसम में लोगों की समस्या और बढ़ जाती है। तेज धूप से बचने के लिए आसपास कोई भी छायादार वृक्ष भी नहीं है। कारण इस दाह संस्कार से निकलने वाले धुआं से वायु प्रदूषण हो रहा है।

अंतिम यात्रा में आने वाले लोगों के लिए पानी, बिजली, जलावन की कोई व्यवस्था नहीं है। श्मशान घाट परिसर में ही नहीं, आसपास भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे यहां आने वालों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यहां की व्यवस्था देखने के लिए, कोई कर्मचारी भी नहीं है, जो यहां होने वाले दाह संस्कार की प्रक्रिया की निगरानी करे। दाह संस्कार के बाद अस्थि इकट्ठा कर लोग बचा हुआ राख दाह वेदी पर ही छोड़ देते हैं। इसकी सफाई करने वाला भी कोई नहीं है। किसी कर्मचारी या प्रबंध समिति के नहीं होने के कारण यहां कोई अभिलेख या ब्योरा नहीं रखा जाता है।

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