
रांची: केंद्रीय सरना समिति ने नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ और कुछ नागपुरी एल्बमों में कथित अश्लीलता, धर्मांतरण को बढ़ावा देने तथा आदिवासी समाज की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में समिति ने होटल गंगा आश्रम में प्रेस वार्ता आयोजित की।
समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि फिल्म में आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा और उरांव समुदाय के संबंध में आपत्तिजनक चित्रण किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था, जिसके बाद आयोग ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य पाहन जगलाल पाहन और प्रधान महासचिव अशोक मुंडा ने कहा कि फिल्म और एल्बम निर्माण के दौरान आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। समिति ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी आदिवासी संस्कृति को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री प्रस्तुत की गई तो उसके खिलाफ सामाजिक और कानूनी स्तर पर विरोध किया जाएगा।
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