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पुलिस के बयान को खबर बनाना अपराध नहीं, पत्रकार को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत

September 10, 2026 Khaberaajtak@gmail.com 1 min read

रांची (ख़बर आजतक) : झारखंड हाईकोर्ट ने पत्रकारों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पत्रकार किसी पुलिस अधिकारी के आधिकारिक बयान के आधार पर समाचार प्रकाशित करता है, तो महज उस रिपोर्टिंग के लिए उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।


जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने देवघर के वरिष्ठ पत्रकार विमलेन्दु नारायण की अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पत्रकार का काम जिम्मेदार सरकारी अधिकारी द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान को निष्पक्ष तरीके से जनता तक पहुंचाना है।


कोर्ट के मुताबिक, संबंधित खबर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के बयान पर आधारित थी। रिपोर्टर ने उसमें अपनी ओर से कोई मनगढ़ंत, भ्रामक या अतिरिक्त तथ्य नहीं जोड़े थे। ऐसे में केवल अधिकारी के बयान को प्रकाशित करने के कारण पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मामला चलाना उचित नहीं है।


हाईकोर्ट ने माना कि आधिकारिक बयान की निष्पक्ष रिपोर्टिंग पत्रकारिता का सामान्य और वैध हिस्सा है। इसी आधार पर अदालत ने विमलेन्दु नारायण की अपील स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई से उन्हें बड़ी राहत दी। फैसला पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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