
रांची: वाइबीएन विश्वविद्यालय में शुक्रवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बहुआयामी उपयोग पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। “अलग-अलग क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करना” विषय पर आयोजित सम्मेलन में विज्ञान, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और सामाजिक विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। मुख्य अतिथि झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता तेजी से विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है, लेकिन इसके उपयोग से जुड़े कानूनी और नैतिक सवालों पर भी गंभीरता से विचार जरूरी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उत्तर गलत या गैरकानूनी होने पर जिम्मेदारी डेवलपर, उपयोगकर्ता या कंपनी में से किसकी होगी। उन्होंने छात्रों से एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी और कानून के दायरे में करने की अपील की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) सत्यदेव पोद्दार ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि संस्थापक रामजी यादव ने तकनीकी विकास में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में स्वास्थ्य, सामाजिक विज्ञान तथा विज्ञान-प्रौद्योगिकी के तीन समानांतर सत्रों में शोध, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग पर विमर्श हुआ।
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