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विश्वप्रसिद्ध रितेश मिश्रा-रजनीश मिश्रा के युगल शास्त्रीय गायन से गूंजा डीपीएस बोकारो

Khaberaajtak@gmail.com1 min read

बोकारो: दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो में सोमवार की भोर भारतीय शास्त्रीय संगीत के सात सुरों की सतरंगी आभा लेकर आई। भारतीय कला, संस्कृति और समृद्ध विरासत के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में समर्पित अंतरराष्ट्रीय संस्था स्पिक मैके के तत्वावधान में विद्यालय परिसर में एक शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बनारस घराने के सूरज-चांद कहे जाने वाले पद्मभूषण पं. राजन मिश्रा एवं पं. साजन मिश्रा की महान संगीतमय विरासत को विश्वपटल पर आगे बढ़ा रहे पं. रितेश मिश्रा एवं पं. रजनीश मिश्रा की जोड़ी ने अपने युगल गायन से ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण भक्ति, भाव और आनंद के असीम रस में सराबोर हो उठा।

पं. राजन मिश्रा के सुपुत्र एवं पं. साजन मिश्रा के भतीजे पं. रितेश व पं. रजनीश ने अपनी प्रस्तुतियों का शुभारंभ संगीत की महिमा और सुरों के सौंदर्य को रेखांकित करती अनूठी रचना – सा सुंदर, रे सुंदर, ग भी सुंदर है; हर एक स्वर कितना सुंदर, संगीत अमर है… से किया। इस रचना में विद्यार्थियों, शिक्षकों और पूरे विद्यालय परिवार ने कलाकारों के साथ सुर में सुर मिलाकर आकर्षक संगीतमय जुगलबंदी रची। इसके उपरांत प्रातःकालीन राग अहिर भैरव पर आधारित और तीन ताल में निबद्ध प्रसिद्ध बंदिशों जोगिया आजा… और अलबेला सजन आयो री… के गायन से ऐसा माहौल बनाया कि सभी मंत्रमुग्ध हो उठे। उनके साथ तबले पर कौशिक कुंवर की धुआंधार संगत ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में उन्होंने निर्गुण और भक्तिरस से सराबोर भजन साधो ऐसा ही गुरु भावे… की मर्मस्पर्शी प्रस्तुति से वातावरण में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर दिया। उनके साथ हारमोनियम पर सुमित मिश्रा ने कुशल संगत की। इस क्रम में मिश्रा बंधुओं ने विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया और संगीत की बारीकियों व साधना से जुड़े उनके विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया।

इससे पूर्व, विद्यालय आगमन पर प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने अतिथि कलाकारों का आत्मीय स्वागत किया। समारोह के दौरान प्राचार्य ने बनारस घराने के मशालवाहक के रूप में विख्यात पं. रितेश मिश्रा, पं. रजनीश मिश्रा तथा सहयोगी कलाकारों को शॉल भेंटकर उनका अभिनंदन किया और इस अविस्मरणीय प्रस्तुति के लिए आभार जताया। स्पिक मैके की पहल को अनुकरणीय बताते हुए प्राचार्य डॉ. गंगवार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हमारी नई पीढ़ी को भारत की महान सांस्कृतिक जड़ों, शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और अमूल्य धरोहर से जोड़ने का एक स्वर्णिम माध्यम है। संगीत आत्मा को शुद्ध करता है और विद्यार्थियों में एकाग्रता व संवेदनशीलता का संचार करता है।

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