BREAKING NEWS
JSSC-CGL रद्द होने पर भड़का आक्रोश, नौकरी बचाने सड़क पर उतरे कर्मचारीजीवन कौशल प्रशिक्षण के साथ युवाओं ने ली नशामुक्ति की शपथ90 एकड़ जमीन पर बीएसएल का शिकंजा, को-ऑपरेटिव सोसाइटी को 30 दिन का अल्टीमेटमचिन्मय विद्यालय बोकारो के स्वर्ण महोत्सव में संस्कृति की चमक, 41 मेधावी विद्यार्थियों को मिला सम्मान130 नए बच्चों को प्रायोजन योजना से जोड़ने की मिली मंजूरी, दुर्घटना में अनाथ बच्चों को भी मिलेगा योजना का लाभ37,499 विस्थापित परिवारों के नियोजन का विस्तृत ब्योरा मांगा, 5 सितंबर तक सूची देने का निर्देशJSSC-CGL रद्द होने पर भड़का आक्रोश, नौकरी बचाने सड़क पर उतरे कर्मचारीजीवन कौशल प्रशिक्षण के साथ युवाओं ने ली नशामुक्ति की शपथ90 एकड़ जमीन पर बीएसएल का शिकंजा, को-ऑपरेटिव सोसाइटी को 30 दिन का अल्टीमेटमचिन्मय विद्यालय बोकारो के स्वर्ण महोत्सव में संस्कृति की चमक, 41 मेधावी विद्यार्थियों को मिला सम्मान130 नए बच्चों को प्रायोजन योजना से जोड़ने की मिली मंजूरी, दुर्घटना में अनाथ बच्चों को भी मिलेगा योजना का लाभ37,499 विस्थापित परिवारों के नियोजन का विस्तृत ब्योरा मांगा, 5 सितंबर तक सूची देने का निर्देश
Uncategorized

90 एकड़ जमीन पर बीएसएल का शिकंजा, को-ऑपरेटिव सोसाइटी को 30 दिन का अल्टीमेटम

August 18, 2026 Khaberaajtak@gmail.com 2 min read

बोकारो (ख़बर आजतक) : बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने बोकारो स्टील एम्प्लॉइज को-ऑपरेटिव हाउस कंस्ट्रक्शन सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ लीज एग्रीमेंट की शर्तों के उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बीएसएल ने सोसाइटी को नोटिस जारी कर मूल लीज समझौते के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने तथा नियमों के विपरीत किए गए सदस्यता, प्लॉट एवं भवनों के हस्तांतरण पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है।


बीएसएल के अनुसार, सोसाइटी को 4 दिसंबर 1970 को निष्पादित लीज एग्रीमेंट के तहत 90 एकड़ भूमि 60 वर्षों की अवधि के लिए आवासीय उद्देश्य से लीज पर दी गई थी। समझौते की धारा 4, 12 और 16 में भूमि के उपयोग, प्लॉट आवंटन और हस्तांतरण से संबंधित स्पष्ट प्रावधान निर्धारित हैं। इन प्रावधानों के अनुसार लीज भूमि का इस्तेमाल बोकारो स्टील प्लांट के सेवारत कर्मचारियों की आवासीय सुविधा के लिए किया जाना था।


बीएसएल ने नोटिस में वर्ष 2022 में सोसाइटी द्वारा किए गए बायलॉज संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। आरोप है कि सोसाइटी ने बीएसएल की पूर्व अनुमति के बिना अपने बायलॉज में संशोधन कर नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ भूतपूर्व एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी सदस्यता के दायरे में शामिल कर लिया। बीएसएल ने इसे मूल लीज एग्रीमेंट की शर्तों के विपरीत बताया है।


बीएसएल ने स्पष्ट किया है कि सोसाइटी के बायलॉज में एकतरफा संशोधन किए जाने से बीएसएल के साथ निष्पादित मूल लीज एग्रीमेंट की शर्तें स्वतः नहीं बदल जातीं। लिहाजा सदस्यता, प्लॉट आवंटन, भवन निर्माण तथा उनके हस्तांतरण की पूरी व्यवस्था मूल लीज समझौते के अनुरूप ही संचालित करनी होगी।


30 दिन में व्यवस्था सुधारने का निर्देश
बीएसएल ने सोसाइटी को 30 दिनों के भीतर मूल लीज एग्रीमेंट के अनुरूप सदस्यता एवं हस्तांतरण व्यवस्था बहाल करने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में लीज शर्तों के विपरीत किसी भी प्लॉट या भवन के हस्तांतरण, म्यूटेशन अथवा अन्य प्रकार के ट्रांसफर पर तत्काल रोक लगाने को कहा गया है।
इसके अलावा सोसाइटी से अब तक किए गए सभी प्लॉट एवं भवनों के हस्तांतरण का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। बीएसएल ने पूरे लीज क्षेत्र के भौतिक सत्यापन और ऑडिट में भी आवश्यक सहयोग देने का निर्देश दिया है, ताकि किसी भी संभावित अनधिकृत हस्तांतरण या अन्य गतिविधि की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।


नियम नहीं माने तो कार्रवाई की चेतावनी
बीएसएल ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में निर्देशों का अनुपालन नहीं किए जाने पर प्रचलित कानून और लीज एग्रीमेंट में निहित संविदात्मक प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
बीएसएल ने सभी संबंधित पक्षों से कहा है कि प्लॉट या भवन से जुड़े किसी भी हस्तांतरण अथवा लेन-देन से पहले लीज एग्रीमेंट और लागू वैधानिक प्रावधानों की जानकारी प्राप्त करें तथा निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करें। बीएसएल के इस नोटिस के बाद को-ऑपरेटिव कॉलोनी की सदस्यता, प्लॉट आवंटन और पूर्व में हुए हस्तांतरण को लेकर आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

← चिन्मय विद्यालय बोकारो के स्वर्ण महोत्सव में संस्कृति की चमक, 41 मेधावी विद्यार्थियों को मिला सम्मान जीवन कौशल प्रशिक्षण के साथ युवाओं ने ली नशामुक्ति की शपथ →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News

Opinion

View All →
रम
रमेश शर्मा
वरिष्ठ संपादक

भारत की विदेश नीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है।

पव
पवन वर्मा
राजनीतिक विश्लेषक

लोकतंत्र की जड़ें मज़बूत करने के लिए शिक्षा में सुधार जरूरी है।

नप
नेहा पाटिल
आर्थिक विशेषज्ञ

बजट से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद थी, पर महंगाई चुनौती बनी है।

अक
अरुण कुमार
पूर्व IAS अधिकारी

सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल इंडिया की पहल कारगर है।