
रांची/दुमका : हूल दिवस के अवसर पर मंगलवार को पूरे झारखंड में हूल क्रांति के महानायकों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित कर उनके त्याग और बलिदान को याद किया गया।रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हूल दिवस शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का ऐतिहासिक प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन महानायकों ने विपरीत परिस्थितियों में क्रांति की मशाल जलाई, जो आज भी समाज को न्याय और समानता के लिए प्रेरित करती है।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी लोक भवन में सिदो-कान्हू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने हूल क्रांति को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली अध्याय बताया।

आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने मोरहाबादी पार्क में श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हूल विद्रोह जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता है और आज भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।

वहीं भाजपा ने राज्यभर में हूल दिवस मनाया। भोगनाडीह और रांची में आयोजित कार्यक्रमों में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान आदित्य साहू ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा, जबकि बाबूलाल मरांडी ने हूल आंदोलन को जनजागरण का प्रतीक बताया।रांची विश्वविद्यालय में भी हूल दिवस मनाया गया।

राँची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि इन महानायकों का योगदान अविस्मरणीय है और उनके आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

दुमका में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए एक और हूल की जरूरत है। उन्होंने सरकार पर आदिवासी हितों की उपेक्षा का आरोप लगाया और लोगों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।पूरे राज्य में हूल दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभाएं, पौधारोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर वीर शहीदों को नमन किया गया।
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