
रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि देश के 40 प्रतिशत खनिज संसाधनों वाला झारखंड नीतिगत विफलता और प्रशासनिक सुस्ती के कारण खनन, राजस्व और रोजगार के मामले में पिछड़ गया है। उन्होंने कहा कि 2019-20 से अब तक देश में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, लेकिन झारखंड में केवल तीन ब्लॉकों की नीलामी हुई, जबकि ओडिशा और छत्तीसगढ़ इससे कहीं आगे हैं।

मरांडी ने कहा कि सारंडा और चाईबासा क्षेत्र में कई खदानें वर्षों से बंद हैं, जिससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि नोआमुंडी की अधिकांश पत्थर खदानें बंद हैं और झींकपानी का एसीसी प्लांट भी बंद होने की कगार पर है, जिससे करीब 1600 परिवार प्रभावित होंगे।
उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम में डीएमएफटी फंड के उपयोग में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि 2016 से 2026 के बीच लगभग ₹3,700 करोड़ जमा होने के बावजूद खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। मरांडी ने बंद खदानों की शीघ्र नीलामी, खनन गतिविधियों को पुनर्जीवित करने, रोजगार बढ़ाने और डीएमएफटी फंड का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा का लाभ सबसे पहले राज्य की जनता को मिलना चाहिए।
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