
मोबाइल की लत छोड़ किताबों को अपना साथी बनाएं विद्यार्थी : प्राचार्य डॉ. गंगवार
बोकारो (ख़बर आजतक) : डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया के इस दौर में जब किताबों की खुशबू कहीं खोती जा रही है, तब दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो के प्रांगण में हजारों किताबों के साथ ज्ञान, कल्पना और विचारों का एक जीवंत संसार उतर आया। विद्यार्थियों में अध्ययन की आदत पुनर्जीवित करने, पठन-पाठन के प्रति रुचि जगाने और ज्ञान के क्षितिज को विस्तार देने के उद्देश्य से शुक्रवार को विद्यालय में दो-दिवसीय पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध प्रकाशन संस्थान स्कॉलास्टिक के सहयोग से आयोजित यह पुस्तक मेला विद्यालय की सीनियर और प्राइमरी दोनों ही इकाइयों में एक साथ लगाया गया है। फीता काटकर मेले का औपचारिक उद्घाटन करते हुए विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने विद्यार्थियों से किताबों के साथ अटूट रिश्ता जोड़ने का आह्वान किया।

दोनों इकाइयों को मिलाकर इस मेले में लगभग चार हजार एक से बढ़कर एक ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और विचारोत्तेजक पुस्तकें प्रदर्शनी और बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। मेले में ज्ञान-विज्ञान, हॉबीज, नॉन-फिक्शन, कालजयी कविताएं, कहानियां, वैश्विक उपन्यास और नन्हे छात्र-छात्राओं के लिए खेल-खेल में पढ़ाई से जुड़ी रोचक सामग्री का एक विशाल और अनूठा संग्रह सजाया गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर के ख्याति-प्राप्त लेखकों, चिंतकों और महान हस्तियों की कृतियों के साथ-साथ आश्चर्यजनक तथ्यों, समृद्ध शब्दकोश, अंग्रेजी व्याकरण, मुहावरे, दिमागी कसरत की पहेलियां, वैदिक गणित, क्विज़, अंतरिक्ष विज्ञान, ग्राफिक्स नॉवेल्स और मुंशी प्रेमचंद की अमर रचनाओं से लेकर महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों पर आधारित पुस्तकें हर वर्ग के पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

इस अवसर पर विद्यार्थियों में किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित करने पर जोर देते हुए प्राचार्य डॉ. गंगवार ने कहा कि आज के दौर में जहां बच्चे मोबाइल फोन पर रील्स और शॉर्ट्स देखने में अपना कीमती समय और एकाग्रता नष्ट कर रहे हैं, उससे कहीं बेहतर और सार्थक है कि वे किताबों की शरण में आएं और अपने ज्ञान के स्तर को समृद्ध करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और मोबाइल स्क्रीन क्षणिक मनोरंजन तो दे सकती है, लेकिन गहरी सोच, संवेदनशीलता और चरित्र-निर्माण केवल किताबें ही कर सकती हैं। किताबें ज्ञान का ऐसा अथाह सागर हैं जो कभी खाली नहीं होता। एक अच्छी किताब मनुष्य की सबसे सच्ची, वफादार और निस्वार्थ मित्र होती है, जो बिना किसी शर्त के मार्गदर्शन करती है और कठिन से कठिन समय में भी सही राह दिखाती है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि किताबें केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं हैं, बल्कि यह जीवन को समझने, कल्पनाशीलता को पंख देने और एक विवेकशील व सफल इंसान बनने का सबसे मजबूत माध्यम हैं। उन्होंने बच्चों से प्रतिदिन कम से कम कुछ समय डिजिटल दुनिया से कटकर किसी अच्छी किताब के पन्नों के साथ बिताने का संकल्प लेने की अपील की।
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