‘नए सिलसिले’ यूट्यूब चैनल परंपरा, आध्यात्म और मानवता के संदेश को दे रहा नई उड़ान

बोकारो। गुरु गोविंद सिंह एजुकेशनल सोसाइटी टेक्निकल कैंपस, कांड्रा, चास, बोकारो के निदेशक डॉ. प्रियदर्शी जरूहार द्वारा प्रारंभ किया गया यूट्यूब चैनल ‘नए सिलसिले’ आज अपनी लोकप्रियता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। चैनल के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए मानवता, प्रेम, सद्भाव और विश्व शांति का संदेश दिया जा रहा है।

प्रेस वार्ता के दौरान ‘नए सिलसिले’ की अवधारणा के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए डॉ. प्रियदर्शी जरूहार ने बताया कि यह पहल मूल रूप से भक्ति एवं सूफी आंदोलनों की शिक्षाओं, विचारधारा और समन्वयवादी संस्कृति से प्रेरित है। इसमें सूफी संतों—ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी, मनेर के फिरदौसी संतों तथा हजरत निजामुद्दीन औलिया—की विचारधारा को प्रमुखता दी गई है। इन संतों ने गंगा-जमुनी तहजीब, प्रेम, भाईचारे और मानवतावाद को अपने जीवन एवं संदेश का आधार बनाया।

उन्होंने कहा कि भारतीय संत परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास, मीराबाई, संत कबीर, गुरु नानक देव, संत रविदास, श्री हरिदास जी, चैतन्य महाप्रभु, श्री गजानन महाराज, शेगांव तथा श्री स्वामी समर्थ महाराज, आलंदी के ज्ञानेश्वर महाराज, शिरडी के साईं बाबा, डॉ फादर कामिल बुल्के, तीर्थानकार वासुपूज्य महाराज इत्यादि जैसे महापुरुषों के जीवन, विचारों, दृष्टांतों और शिक्षाओं से भी ‘नए सिलसिले’ की विषयवस्तु प्रेरणा लेती है।

डॉ. जरूहार के अनुसार, ‘नए सिलसिले’ का उद्देश्य किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित रहना नहीं, बल्कि भारत की समन्वयवादी संस्कृति और विविधता में एकता को सामने लाना है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों के बीच प्रेम, भाईचारे और एकता की भावना को मजबूत करते हुए यह पहल विश्व शांति, विश्व प्रेम, मानवता के विकास और मानवता की रक्षा का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी इसी साझा संस्कृति और मानवीय मूल्यों में निहित है।

चैनल पर अब तक 13 एपिसोड प्रसारित किए जा चुके हैं, जिनमें धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों के साथ-साथ संस्कृति, कला, सामाजिक सरोकार, महिला सशक्तिकरण और व्यवसाय से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है। इन एपिसोडों को देश-विदेश में दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

चैनल के चर्चित एपिसोडों में एपिसोड-2 ‘नए सिलसिले क्या है’, एपिसोड-08 ‘द लास्ट शिप’, एपिसोड १० गुरु साहबो ने मॉडर्न भारत का किया पुनर्निर्माण तथा एपिसोड-12 में ज्योतिष के विषय में ‘नए सिलसिले’ का मंतव्य प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त ‘श्री राधा रानी वृंदावन की अधिष्ठात्री देवी क्यों?’, ‘श्री हनुमान जी के वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए पांच निर्देश’ तथा ‘ये दिन भी नहीं रहेंगे’ जैसे विषयों ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। ‘ये दिन भी नहीं रहेंगे’ में सूफी परंपरा के एक दरवेश की प्रेरक कहानी प्रस्तुत की गई है।

इसी क्रम में अकबर के दरबार के नौ रत्नों में शामिल अब्दुर्रहीम खानखाना जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन एवं विचारों पर भी सामग्री उपलब्ध है, जिससे दर्शकों को भारतीय इतिहास, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।

‘नए सिलसिले’ में आध्यात्म और संस्कृति के साथ व्यवसाय एवं उद्यमिता को भी विशेष स्थान दिया गया है। भावी उद्यमियों तथा वर्तमान व्यवसायियों के लिए ‘बिजनेस के पांच इंटेलेक्ट्स’ जैसे विषयों के माध्यम से व्यवसाय में सफलता, सोच और नेतृत्व से जुड़े उपयोगी संदेश प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

डॉ. प्रियदर्शी जरूहार ने कहा कि ‘नए सिलसिले’ केवल एक यूट्यूब चैनल नहीं, बल्कि विचारों, संस्कृतियों और मानवीय मूल्यों को जोड़ने का एक प्रयास है। इसका मूल संदेश यही है कि अलग-अलग आस्थाओं और परंपराओं के बावजूद मानवता सभी को एक सूत्र में बांध सकती है। इसी भावना के साथ यह पहल आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इसके माध्यम से और व्यापक स्तर पर समाज एवं विश्व को प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।

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