
बोकारो : चिन्मय विद्यालय बोकारो में चिन्मय मिशन बोकारो की ओर से आयोजित गीता पंचामृत ज्ञान यज्ञ का तीसरा और अंतिम सत्र बुधवार को आध्यात्मिक भाव और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ।

परम पूज्य स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती ने गीता के श्लोकों की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण में है और अहंकार का त्याग ही आध्यात्मिक साधना की चरम अवस्था है।
स्वामी जी ने “सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज” की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को भय, तनाव और असुरक्षा से मुक्त होने के लिए अहंकार एवं स्वार्थपूर्ण इच्छाओं का त्याग करना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया—“तत् त्वम् असि”, अर्थात अपने दिव्य स्वरूप को पहचानें और सेवा, संयम व समर्पण के साथ जीवन जिएं।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आईएफएस संदीप शिंदे एवं नेहा पाटिल ने आरती की। इस अवसर पर स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती, परिपूर्णानंद सरस्वती, सुघोषानंद सरस्वती, बिस्वरूप मुखोपाध्याय, महेश त्रिपाठी, हरिहर राउत, नरमेंद्र कुमार और डॉ. रोशन शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे। हजारों श्रद्धालुओं ने ज्ञान यज्ञ का लाभ उठाया।
समापन पर स्वामी तेजोमयानंद ने भक्तों को प्रसाद पुस्तिका भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं, प्रातः सत्र में चिन्मय एलुमनी एसोसिएशन की ओर से रामायण आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया। सफल प्रतिभागियों को स्वामी जी ने सम्मानित किया।
