योग साधना में सम्मान और निरंतरता का महत्व : श्री श्री रवि शंकर

रांची: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि योग केवल आसनों और शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, बुद्धि और चेतना को परिष्कृत करने का विज्ञान है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि योग का अभ्यास लंबे समय तक, निरंतर और आदर-भाव के साथ किया जाए, तभी वह जीवन में स्थायी परिवर्तन लाता है।

उन्होंने कहा कि योग और ध्यान व्यक्ति को वर्तमान में जीना, तनाव से मुक्त रहना तथा भीतर खुशी और उत्साह बनाए रखना सिखाते हैं। बच्चों को कम उम्र से ही योग और ध्यान की शिक्षा देने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि योग, प्राणायाम और ध्यान न केवल तनाव कम करते हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वस्थ, दीर्घायु जीवन जीने में भी सहायक होते हैं। उनके अनुसार, साधना में कृतज्ञता, सम्मान और निरंतरता का भाव ही योग का वास्तविक उत्सव है।

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