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चिन्मय विद्यालय बोकारो के स्वर्ण महोत्सव में संस्कृति की चमक, 41 मेधावी विद्यार्थियों को मिला सम्मान

August 18, 2026 Khaberaajtak@gmail.com 2 min read

भारतीय संस्कृति का ज्ञान ही चिन्मय की सबसे बड़ी पहचान : केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी

बोकारो (ख़बर आजतक) : चिन्मय विद्यालय बोकारो ने अपनी स्थापना के 50वें वर्ष में प्रवेश के साथ स्वर्ण जयंती समारोह की शुरुआत की। 1977 में स्थापित यह विद्यालय शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए भी जाना जाता है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी शामिल हुईं।

उनके साथ पूर्व विधायक बीरंची नारायण, चिन्मय मिशन बोकारो की आवासीय आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती, अध्यक्ष बिस्वरूप मुखोपाध्याय, सचिव महेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष आरएन मलिक, प्राचार्य सूरज शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। प्री-प्राइमरी के विद्यार्थियों ने भगवद्गीता के 12वें अध्याय का पाठ किया। इसके बाद शिव स्तुति, संथाली नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह में रंग भर दिया। 350 से अधिक विद्यार्थियों ने कृष्ण लीला का भव्य मंचन कर श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर प्रेम प्रसंग तक की कथा प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

मुख्य अतिथि अन्नपूर्णा देवी ने बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 41 से अधिक विद्यार्थियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता से विद्यार्थियों को जोड़ने का कार्य चिन्मय विद्यालय को अन्य संस्थानों से अलग पहचान देता है। विद्यालय के एलुमनी देश-विदेश में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने जिस ज्ञान दीप की नींव रखी थी, विद्यालय आज उसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है। समारोह में पूर्व प्राचार्यों, शिक्षकों और एलुमनी एसोसिएशन के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। प्राचार्य सूरज शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार जताते हुए विद्यार्थियों से सीखने की प्रक्रिया निरंतर जारी रखने का आह्वान किया।

अंत में वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के आयोजन समिति में सुब्रता गुप्ता, मिनाक्षी कुमारी, सोनाली गुप्ता, सीबेन चक्रबर्ती और अन्य शिक्षक एवं स्टाफ शामिल थे।

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