
रांची: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मोरहाबादी मैदान में आयोजित दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव का कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अवलोकन किया। उन्होंने महोत्सव में लगे विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर झारखंड की आदिवासी कला, संस्कृति, परंपराओं और जीवन-दर्शन को करीब से देखा।

महोत्सव में कलाकारों की पेंटिंग और विभिन्न कलाकृतियों के माध्यम से आदिवासी जीवन, संघर्ष, प्रकृति से जुड़ाव और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। मंत्री ने कलाकारों की रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति केवल पहचान नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का दर्शन भी है। इसमें प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक भावना और सह-अस्तित्व का संदेश निहित है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। आदिवासी कला एवं संस्कृति के संरक्षण और प्रोत्साहन की जिम्मेदारी सभी की है। उन्होंने लोगों से अपनी गौरवशाली विरासत को संजोने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
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