BREAKING NEWS
डीपीएस रांची में मनाया गया तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवसगोमिया: सीसीएल कथारा क्षेत्र के स्वांग वाशरी आवासीय परिसर की सड़कें बदहाल, हादसों का खतराहरे परिधानों में सजी महिलाओं ने मनाया भव्य सावन महोत्सवगिरिडीह जिले के गांडेय से दो अपहृत युवकों को पुलिस ने सकुशल बरामद किया दो आरोपी गिरफ्तार।ज्ञान के प्रति भूख जरूरी, विद्यार्थी अपनी क्षमता निखारें : निदेशक प्रभारी प्रिय रंजनदिल्ली की ‘लेडी सिंघम’ का गिरिडीह में सम्मान, लाखों महिलाओं को सिखा चुकीं आत्मरक्षाडीपीएस रांची में मनाया गया तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवसगोमिया: सीसीएल कथारा क्षेत्र के स्वांग वाशरी आवासीय परिसर की सड़कें बदहाल, हादसों का खतराहरे परिधानों में सजी महिलाओं ने मनाया भव्य सावन महोत्सवगिरिडीह जिले के गांडेय से दो अपहृत युवकों को पुलिस ने सकुशल बरामद किया दो आरोपी गिरफ्तार।ज्ञान के प्रति भूख जरूरी, विद्यार्थी अपनी क्षमता निखारें : निदेशक प्रभारी प्रिय रंजनदिल्ली की ‘लेडी सिंघम’ का गिरिडीह में सम्मान, लाखों महिलाओं को सिखा चुकीं आत्मरक्षा
Uncategorized

जेटेट 2026 में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग

May 30, 2026 Khaberaajtak@gmail.com 1 min read

रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू को झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को शामिल करने संबंधी लिखित सुझाव सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2008, 2012 और 2016 की शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में अंगिका, भोजपुरी और मगही को क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन वर्तमान अधिसूचना में इन्हें स्थान नहीं दिया गया है।

सुझाव में मैथिली, अंगिका, भोजपुरी, मगही के साथ असुर, बिरहोर और माल्तो जैसी जनजातीय भाषाओं को भी शामिल करने की मांग की गई। साथ ही संथाल परगना में कुरमाली भाषा को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देते हुए सभी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

← राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की दावेदारी पर संशय, दोनों सीटों पर झामुमो का दावा मजबूत रांची में जेएम ऑटिज्म एवं न्यूरो रिहैब सेंटर का उद्घाटन →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News

Opinion

View All →
रम
रमेश शर्मा
वरिष्ठ संपादक

भारत की विदेश नीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है।

पव
पवन वर्मा
राजनीतिक विश्लेषक

लोकतंत्र की जड़ें मज़बूत करने के लिए शिक्षा में सुधार जरूरी है।

नप
नेहा पाटिल
आर्थिक विशेषज्ञ

बजट से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद थी, पर महंगाई चुनौती बनी है।

अक
अरुण कुमार
पूर्व IAS अधिकारी

सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल इंडिया की पहल कारगर है।